लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारों की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ लड़ने वाले युवा नेता आज 2 सितंबर को कांग्रेस में शामिल होकर सक्रिय सियासी पारी शुरू कर रहे हैं. यूपी में अब तक कई बड़े आंदोलनों में सक्रिय रहे शाहनवाज आलम, अनिल यादव के साथ लक्ष्मण प्रसाद, सुधांशु वाजपेयी, अक्षत शुक्ला, श्रवण साहू, दिनेश सिंह, सरिता पटेल, फरहान वारसी सहित 100 से अधिक युवा कांग्रेस में शामिल हो गए. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर इन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई. जल्द ही इन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. बता दें कि इन युवाओं ने 9 अगस्त को राहुल गांधी से मुलाकात की थी. ये युवा नेता देश के सभी बड़े आन्दोलनकारी युवाओं के साथ मंच साझा कर चुके हैं. कांग्रेस में शामिल होकर इन युवा नेताओं ने कहा कि वह साम्प्रदायिकता के खिलाफ राहल गांधी का साथ देने को तैयार हैं. Also Read - बिहार: कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय से 8 लाख रुपए बरामद, इनकम टैक्स अफसरों ने रणदीप सिंह सुरजेवाला से की पूछताछ

कौन हैं शाहनवाज व अनिल यादव
शाहनवाज आलम व अनिल यादव ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से छात्र राजनीति की शुरुआत की थी. अपने साथियों के साथ दोनों युवा नेता देश के अन्य हिस्सों के साथ ही मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश में साम्प्रदायिकता, सामाजिक न्याय और दलित उत्पीड़न के सवाल पर सक्रिय रहे हैं. शाहनवाज आलम ने मुस्लिम मुद्दों को न सिर्फ सड़को पर उठाया बल्कि वैचारिक तौर पर भी नई धार दी. शाहनवाज ने गंभीर मुद्दों पर कुछ किताबें भी लिखी हैं. वहीं, अनिल यादव राजनैतिक विश्लेषक के तौर पर भी जाने जाते हैं. शाहनवाज व अनिल यादव कहते हैं कि वह सक्रिय राजनीति कर लोगों के लिए लड़ना चाहते हैं. लोगों को अधिकार दिलाने के लिए राजनैतिक प्रतिनिधित्व की भी जरूरत है. साम्प्रदायिकता से देश और यूपी को बचाने के लिए कांग्रेस का साथ एक बेहतर विकल्प है. Also Read - भाजपा सरकार की न तो नीतियां सही हैं, नीयत, योगी राज में विकास का पहिया थम गया है : अखिलेश

क्या कांग्रेस को फायदा होगा
अपने बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस के साथ ठीक लोकसभा चुनाव से पहले इन युवाओं का पार्टी में शामिल होना पार्टी के लिए राहत देने वाली खबर है. कांग्रेस पार्टी के मुताबिक शाहनवाज, अनिल के साथ ही ये युवा इंसाफ अभियान व वंचितों, दलितों और व्यवस्था द्वारा सताए, फंसाए लोगों की आवाज बन चुके संगठन ‘रिहाई मंच’ से जुड़े रहे हैं. रिहाई मंच लंबे समय से साम्प्रदायिकता और उन लोगों के लिए भी लड़ता आया है जिन्हें आतंकवाद के नाम पर झूठे मुकदमों में फंसा दिया जाता है. रिहाई मंच देश भर में अब तक दर्जनों फंसाए गए लोगों को अदालत के जरिए निर्दोष साबित कर छुड़वा चुका है. ऐसे में दलितों, वंचितों व मुस्लिमों में ये संगठन लोकप्रिय है. पूर्वांचल व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ये युवा नेता लोगों के बीच खासी पकड़ रखते हैं. माना जा रहा है कि इन इलाकों में कांग्रेस को इन युवाओं के शामिल होने से अच्छा फायदा होगा. Also Read - वादा तेरा वादा.....बिहार चुनाव में लगी वादों की झड़ी, किस पार्टी ने जनता से क्या की है प्रॉमिस, जानिए