Maha Kumbh: मौनी अमावस्या 'अमृत स्नान' के लिए प्रशासन की खास अपील, बताया- भगदड़ से बचने के लिए श्रद्धालु क्या करें, क्या नहीं

Maha Kumbh 2025: महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर 10 करोड़ श्रद्धालुओं के प्रयागराज पहुंचने की उम्मीद है. प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये हैं और अफवाहों से बचने की अपील की है.

Published date india.com Updated: January 28, 2025 5:04 PM IST
Maha Kumbh: मौनी अमावस्या 'अमृत स्नान' के लिए प्रशासन की खास अपील, बताया- भगदड़ से बचने के लिए श्रद्धालु क्या करें, क्या नहीं

Maha Kumbh: महाकुंभ में मौनी अमावस्या के दिन होने वाले अमृत स्नान में 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के संगम नगरी प्रयागराज पहुंचने की अनुमान है. प्रयागराज पुलिस-प्रशासन ने इसे देखते हुए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कड़ी कर दी है. प्रशासन की तरफ से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर में जगह-जगह होर्डिंग्स भी लगवाए गए हैं. प्रयागराज रेलवे स्टेशन से कुंभ की ओर जाने वाले रास्तों की तमाम गली-मोहल्ले की सड़कों को भी सील कर दिया गया है. श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है. इसके अलावा आपात स्थिति में मेला पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और स्पेशल डॉक्टरों की टीम श्रद्धालुओं की देखरेख के लिए 24 घंटे तैनात की गई है.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महाकुंभ नगर राजेश द्विवेदी ने बताया कि दूसरे मौनी अमावस्या पर होने वाले ‘अमृत स्नान’ को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं. खासकर श्रद्धालुओं को जागरूक किया जा रहा है कि वो सजग रहें और किसी तरह की अफवाह में न फंसें. व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस का सहयोग करें और किसी भी तरह की समस्या में पुलिस का सहयोग लें. पुलिस और प्रशासन श्रद्धालुओं की मदद के लिए 24 घंटे उपलब्ध हैं.

क्या करना है?

  • संगम घाट पहुंचने के लिए अलग-अलग लेन से ही जाएं.
  • गंगा स्नान के लिए जाते समय अपनी लेन में बने रहें.
  • श्रद्धालु स्नान और दर्शन करने के बाद सीधे पार्किंग की ओर जाएं.
  • मंदिरों में दर्शन के लिए जाते समय अपनी लेन में बने रहें, वहां से अपने गंतव्य स्थान के लिए प्रस्थान करें.
  • जरूरत पड़ने पर पुलिस का सहयोग लें, पुलिस आपकी मदद के लिए है.
  • ट्रैफिक पुलिस भी आपकी मदद के लिए तत्पर है.
  • स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर नजदीकी सेक्टर में बने हॉस्पिटल में जांच कराएं.
  • बैरिकेडिंग और पांटून पुलों पर धैर्य बनाए रखें, जल्दबाजी और धक्कामुक्की से बचें.
  • कागज, जूट या इको फ्रेंडली बर्तनों और कुल्हड़ों का ही प्रयोग करें.
  • सभी घाट संगम घाट है, जिस घाट पर पहुंच जाएं, वहीं स्नान करें.

क्या नहीं करना है?

  • श्रद्धालु कहीं एक साथ एक स्थान पर न रुकें.
  • किसी भी स्थिति में आने और जाने वाले श्रद्धालु आमने-सामने न पड़ें.
  • मेले में किसी के द्वारा फैलाई गई अफवाहों से बचें.
  • सोशल मीडिया पर फैलाए गए किसी भी भ्रम को सच न मानें.
  • मंदिरों में दर्शन के लिए किसी भी प्रकार की हड़बड़ी न दिखाएं.
  • होल्डिंग एरिया के बजाय रास्तों पर न रुकें, किसी तरह का अवरोध न उत्पन्न करें.
  • व्यवस्था या सुविधा को लेकर किसी के भी बहकावे में आने से बचें.
  • किसी प्रकार की भ्रामक खबरों को आगे बढ़ाने से बचें.
  • पवित्र स्नान के लिए किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न करें.
  • प्लास्टिक की पन्नियों और बर्तनों के इस्तेमाल से बचें.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या का स्नान काफी शुभ माना जाता है, इसलिए लाखों की तादाद में लोग संगम नगरी में आस्था की डुबकी लगाने के लिए लगातार पहुंच रहे हैं.

क्या होता है अमृत स्नान?

अमृत स्नान (पूर्व में शाही स्नान), महाकुंभ मेले का सबसे पवित्र और सबसे बड़ा स्नान पर्व होता है. इसमें दुनियाभर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने के लिए संगम नगरी प्रयागराज पहुंचने लगे हैं. अमृत स्नान का मुख्य आकर्षण विभिन्न अखाड़ों के साधुओं का स्नान होता है. अमृत स्नान की तिथियां सूर्य, चंद्र और बृहस्पति के ज्योतिषीय मेल पर आधारित होती हैं. माना जाता है कि इनके योग से पवित्र नदियों की अध्यात्मिक शक्ति बढ़ जाती है. यह भी माना जाता है कि मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों का जल अमृत में परिवर्तित हो जाता है. मौनी अमावस्या का स्नान पारंपरिक रूप से मौन रहकर किया जाता है.

(इनपुट: एजेंसी से भी)

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