लखनऊ: यूपी के लखनऊ में स्थित 150 साल पुराना इदरा-ए-शरिया अब उत्तर प्रदेश के मुस्लिमों को राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के लिए जरूरी 22 दस्तावेज रखने की जानकारी देगा. दस्तावेजों में विरासत, जन्म, शिक्षा और बैंक, शरणार्थी पंजीकरण के साथ-साथ परिवार के बहीखातों समेत अन्य पहचान प्रमाण पत्र शामिल हैं. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहले ही बोल चुके हैं कि एनआरसी पूरे देश में लागू होगी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राज्य में एनआरसी को चरणबद्ध तरीके से पूरे करने के संकेत दिए हैं.

इदरा-ए-शरिया के महासचिव मौलाना अफ्फान अतीक फिरंगी महली ने कहा, असम में एनआरसी के बाद प्रदेश में इसके लागू होने की स्थिति के संबंध में मुस्लिमों में इसको लेकर संभावित परिणामों का डर पैदा हो गया है. उन्होंने कहा, मुस्लिम आम तौर पर दस्तावेज रखने में लापरवाह होते हैं और उन्हें समझाने की जरूरत है. किसी को नहीं पता था कि एक दिन उन्हें उनकी राष्ट्रीयता साबित करनी होगी. लेकिन हमें तैयार होना होगा और समुदाय को तैयार रखना होगा.

एनआरसी के इतिहास, 1955 के भारतीय नागरिकता अधिनियम की हिंदी और उर्दू में जानकारी और परफॉर्मा भी सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जाएगा, जिससे अधिकतम लोगों को जानकारी मिल सके. मस्जिदें, मदरसे और मौलवी इन जानकारियों को समुदाय में प्रसारित कराएंगे.

मौलाना महमूद मदनी ने भी मुस्लिम समुदाय के गरीब और अशिक्षित लोगों से सभी 22 दस्तावेज तैयार रखने की अपील की है और मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्र के दस्तावेजों में जरूरी गलतियों को भी दूर करने के लिए कहा है. मौलाना अफ्फान ने कहा, इससे सूची बनाते समय सरकारी अधिकारियों पर भी कम बोझ पड़ेगा.

(इनपुट-आईएएनएस)