नई दिल्ली. बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती (Mayawati) ने आखिरकार लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में बने सपा-बसपा गठबंधन की औपचारिक टूट पर मुहर लगा दी है. मायावती ने सोमवार को टि्वटर पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर बताया कि उनकी पार्टी भविष्य में होने वाले सभी चुनाव अकेले ही लड़ेगी. बसपा की रविवार को हुई बैठक के बाद मायावती की इस घोषणा के साथ ही समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावनाओं का भी अंत हो गया है. यह भी तय हो गया है कि उत्तर प्रदेश में जल्द ही होने वाले विधानसभा उपचुनाव (Uttar Pradesh Assembly Bypolls 2019) में भाजपा के साथ मैदान में टक्कर लेने के लिए सपा और बसपा अलग-अलग मोर्चाबंदी करेगी.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को ट्वीट कर उनकी पार्टी के सभी चुनाव अकेले लड़ने की जानकारी दी. उन्होंने बसपा की ऑल इंडिया बैठक में मीडिया की गैर-मौजूदगी के बावजूद फ्लैश की गई खबरों पर नाखुशी जताई. मायावती ने अपने ट्वीट में कहा, ‘बीएसपी की आल इण्डिया बैठक कल लखनऊ में ढाई घण्टे तक चली. इसके बाद राज्यवार बैठकों का दौर देर रात तक चलता रहा, जिसमें भी मीडिया नहीं था. फिर भी बीएसपी प्रमुख के बारे में जो बातें मीडिया में फ्लैश हुई हैं, वे पूरी तरह से सही नहीं हैं, जबकि इस बारे में प्रेसनोट भी जारी किया गया था.’

मायावती ने अपने ट्वीट में समाजवादी पार्टी के साथ अपने संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने बीते लोकसभा चुनाव में गठबंधन धर्म का निर्वहन किया. इसके साथ ही उन्होंने सपा की ढेर सारी कमियां भी गिनाई. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में अब सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ना संभव नहीं है. बसपा प्रमुख ने अपने ट्वीट में कहा, ‘वैसे भी जगजाहिर है कि सपा के साथ सभी पुराने गिले-शिकवों को भुलाने के साथ-साथ सन् 2012-17 में सपा सरकार के बीएसपी व दलित विरोधी फैसलों, प्रमोशन में आरक्षण विरुद्ध कार्यों एवं बिगड़ी कानून व्यवस्था आदि को दरकिनार करके देश व जनहित में सपा के साथ गठबंधन धर्म को पूरी तरह से निभाया.’

समाजवादी पार्टी के ऊपर प्रहार करते हुए मायावती ने लोकसभा चुनाव के दौरान गठबंधन के प्रदर्शन की समीक्षा की. उन्होंने इस बात को रेखांकिया कि अब सपा के साथ मिलकर गठबंधन में रहते हुए भाजपा को चुनाव में हरा पाना संभव नहीं है. उन्होंने कहा, ‘परन्तु लोकसभा चुनाव के बाद सपा का व्यवहार बीएसपी को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या ऐसा करके बीजेपी को आगे हरा पाना संभव होगा? जो संभव नहीं है. अतः पार्टी व मूवमेन्ट के हित में अब बीएसपी आगे होने वाले सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले अपने बूते पर ही लड़ेगी.’