लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा सबरीमला मामले पर उच्‍चतम न्‍यायालय के आदेश पर की गई टिप्‍पणी की आज कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अदालत को इसका संज्ञान जरूर लेना चाहिए. मायावती ने यहां जारी बयान में कहा कि शाह का कल केरल के कन्नूर में सुप्रीम कोर्ट को हिदायत देते हुए यह कहना अति-निंदनीय है कि अदालत को ऐसे फैसले नहीं देने चाहिए, जिनका अनुपालन नहीं किया जा सके और न्‍यायालय को आस्था से जुड़े मामले में फैसला देने से बचना चाहिए. न्यायालय को इसका संज्ञान अवश्य लेना चाहिए. Also Read - बेवसी को ताकत बनाकर पंखों से नहीं, पैरों से इस शख्स ने भरी उड़ान

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मायावती ने कहा कि केंद्र में सत्तासीन पार्टी के अध्यक्ष के ऐसे गैर-ज़िम्मेदाराना सार्वजनिक बयानों से यह स्पष्ट है कि देश का लोकतंत्र ख़तरे में है. साथ ही सीबीआई, सीवीसी, ईडी तथा भारतीय रिज़र्व बैंक जैसी देश की महत्त्वपूर्ण स्वायत्तशासी संस्थाओं में इस वक्‍त जो गंभीर संकट का दौर चल रहा है वह इसी प्रकार के ग़लत सरकारी नज़रिये और अहंकार का ही नतीजा है. मालूम हो कि शाह ने कल केरल में सबरीमला मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कथित तौर पर कहा था कि ‘अदालतों को आदेश ऐसे देने चाहिये, जिनका पालन हो सके. ऐसे आदेश नहीं देने चाहिए, जो लोगों की आस्‍था को तोड़ने का काम करें.’ Also Read - पूर्व केंद्रीय मंत्री व सपा के दिग्गज नेता बेनी प्रसाद वर्मा का लखनऊ में निधन

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मायावती ने कहा कि देश में कोर्ट तथा विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ देश की 125 करोड़ आबादी इस पवित्र सिद्धान्त पर एकमत है कि देश संविधान से चलता है और इसी आधार पर आगे भी चलता रहेगा, लेकिन सत्ताधारी भाजपा के वर्तमान नेतृत्व द्वारा इस मामले में उत्तेजक भाषणबाजी करके राजनीतिक रोटी सेंकने का प्रयास बार-बार किया जा रहा है, जो अति-गंभीर और अति-निंदनीय है. उन्‍होंने कहा कि शाह वास्तव में सबरीमला मंदिर मामले को लेकर इतना भड़काऊ, असंसदीय और असंवैधानिक भाषण देकर धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हो रहे विधानसभा चुनावों में करना चाहते हैं.