आरक्षण की नीति को लेकर राहुल गांधी पर भड़कीं मायावती, लगाया ये बड़ा आरोप

मायावती ने X पर एक पोस्ट कर लिखा, कांग्रेस व राहुल गांधी की एससी/एसटी/ओबीसी आरक्षण नीति स्पष्ट नहीं है. ये तो दोगली व छल कपट वाली है.

Published date india.com Published: September 24, 2024 5:12 PM IST
आरक्षण की नीति को लेकर राहुल गांधी पर भड़कीं मायावती, लगाया ये बड़ा आरोप

Reservation in India: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती लगातार कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर हमलावर हैं. दोनों नेताओं के बीच आरक्षण को लेकर दो टूक चल रही है. इस बीच, बसपा की सुप्रीमो ने राहुल गांधी पर ताजा हमला बोला है. मायावती ने कहा, कि कांग्रेस और राहुल गांधी की एससी-एसटी और ओबीसी आरक्षण नीति स्पष्ट नहीं, बल्कि दोगली एवं छल कपट की है.

मायावती बोलीं- कांग्रेस की आरक्षण नीति दोगली

बसपा प्रमुख ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, कांग्रेस व राहुल गांधी की एससी/एसटी/ओबीसी आरक्षण नीति स्पष्ट नहीं, बल्कि दोगली एवं छल कपट की है. अपने देश में इनके वोट के लिए ये आरक्षण का समर्थन व इसे 50 प्रतिशत से ऊपर बढ़ाने की वकालत तथा विदेश में जाकर इनके आरक्षण को खत्म करने की बात करते हैं. इनके इस दोहरे मापदण्ड से लोग सचेत रहें.

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सत्ता के वक्त कांग्रेस ने जातीय जनगणना क्यों नहीं कराई

उन्होंने आगे कहा, कि यह भी सच है कि केंद्र में इनकी सरकार ने ओबीसी आरक्षण संबंधी मण्डल कमीशन रिपोर्ट लागू नहीं की थी. साथ ही, बीएसपी के संघर्ष से एससी/एसटी के पदोन्नति में आरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए संसद में लाए गए संविधान संशोधन बिल को भी कांग्रेस ने पास नहीं होने दिया, जो अभी तक लंबित है.

मायावती ने कहा कि ना ही इस मामले में इनकी सरकार ने कोर्ट में सही से पैरवी की थी. इस आरक्षण विरोधी कांग्रेस व अन्य पार्टियों से भी लोग सजग रहें. साथ ही, केंद्र में रही कांग्रेसी सरकार द्वारा जातीय जनगणना नहीं कराना और अब सत्ता से बाहर होने पर आवाज उठाना, यह सब ढोंग नहीं तो और क्या है?

अपने फायदे के लिए जातिवादी लोगों को उम्मीदवार बनाया

आपको बता दें कि, मायावती ने सोमवार को भी एक्स पर एक पोस्ट किया था. इसमें उन्होंने कहा था कि देश में अभी तक के हुए राजनीतिक घटनाक्रमों से यह साबित होता है. कांग्रेस व अन्य जातिवादी पार्टियों को अपने बुरे दिनों में तो कुछ समय के लिए इनको दलितों को मुख्यमंत्री व संगठन आदि के प्रमुख स्थानों पर रखने की जरूर याद आती है. लेकिन ये पार्टियां, अपने अच्छे दिनों में, फिर इनको अधिकांशतः दरकिनार ही कर देती हैं. साथ ही इनके स्थान पर, फिर उन पदों पर जातिवादी लोगों को ही रखा जाता है, जैसा कि अभी हरियाणा प्रदेश में भी देखने के लिए मिल रहा है.

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