लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए 1995 के कुख्यात राज्य अतिथि गृह की घटना में समाजवादी नेता मुलायम सिंह के खिलाफ अपना मामला वापस लेने का फैसला किया है. बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने पुष्टि की. जिसमें कहा गया है कि उनके पार्टी प्रमुख ने सुप्रीम कोर्ट में मामले को वापस लेने के लिए एक आवेदन दिया था, लेकिन उन्होंने कोई विवरण नहीं दिया.

समाजवादी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि मुझे इसके बारे में अभी जानकारी नहीं है. इसके बारे में पता करेंगे और उसके बाद ही इस पर कुछ कहेंगे. एक अन्य बसपा नेता ने कहा कि मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. सूत्रों के मुताबिक, मायावती ने गुरुवार को पार्टी कार्यकर्ताओं की एक बैठक में कहा कि अखिलेश यादव ने उनसे लोकसभा चुनावों में अपने पिता के खिलाफ 24 साल पुराने मामले को वापस लेने का अनुरोध किया था.

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उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी के राज्यसभा सांसद सतीश मिश्रा से इस मामले को देखने के लिए कहा है. स्टेट गेस्ट हाउस की घटना 2 जून 1995 को हुई थी जब उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन की सरकार थी. मायावती तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार को समर्थन जारी रखने के मुद्दे पर बसपा विधायक की बैठक को संबोधित कर रही थीं. समाजवादी नेताओं ने स्टेट गेस्ट हाउस और मायावती पर हमला किया और बसपा विधायकों ने इनसे बचने के लिए खुद को एक कमरे में बंद कर लिया. कई घंटे बाद रहने के बाद उन्हें भाजपा नेताओं द्वारा बचाया गया और फिर तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार गिर गई. जिसके बाद मायावती ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई और वह मुख्यमंत्री बनीं.

लखनऊ के एक पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था जिसमें मायावती ने दावा किया था कि मुझे मारने के लिए इस घटना को डिजाइन किया गया था. उस समय के कई प्रमुख सपा नेताओं को भी मामले में आरोपी बनाया गया था. इस घटना ने उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरण बदल दिए और 2019 तक सपा और बसपा दुश्मन बन गए. जब अखिलेश यादव ने मायावती के साथ गठबंधन किया था तब उन्होंने स्पष्ट किया कि 1995 की घटना के समय अखिलेश यादव राजनीति में नहीं थे. हालांकि, गठबंधन नहीं टिक पाया और लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद मायावती ने सपा के साथ गठबंधन तोड़ दिया.