लखनऊ: देश में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण लॉकडाउन 4.0 लागू कर दिया गया है. बावजूद इसके अबतक प्रवासी मजदूरों को पूरी तरह उनके घरों तक नहीं पहुंचाया जा सका है. ऐसे में प्रवासी मजदूर आए दिन पैदल अपने गृह राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं. विकलांग हो बुजर्ग. बच्चा हो या परिवार का कोई भी सदस्य जो शारीरिक रूप से कमजोर है उन्हें भी सैकड़ों किलोमीटर की लंबी यात्रा करनी पड़ रही है. इसी से जुड़ा एक भावुक कर देने वाला मामला दिल्ली से उत्तर प्रदेश की ओर जा रहे एक प्रवासी मजदूर के साथ देखने को मिला. यहां एक पिता अपनी बेटी को बोरी के अंदर भरकर ले जाता दिखाई दिया. यह तस्वीरें इतनी मार्मिक हैं कि आपको सोचने पर मजबूर कर देंगी Also Read - लॉकडाउन बढ़ने की बात सुन महिला ने खाया ज़हर, ससुराल से मायके न जा पाने से थी परेशान

लॉकडाउन के कारण मजदूरों का काम ठप्प पड़ गया है ऐसे में राजधानी दिल्ली से उत्तर प्रदेश की ओर जा रहे एक प्रवासी मजदूर अपने परिवार व रिश्तेदारों को साथ पैदल ही निकल पड़ा. इस मजदूर के साथ उसके बच्चे भी हैं. मजदूर की बेटी भी हैं जो दिव्यांग भी है वह भी अपने परिवार के साथ अपने घर की ओर पलायन कर रही है. लेकिन यह बच्ची विकलांग है और ऐसे में वह पैदल नहीं चल सकती है. इस कारण उसके पिता ने देसी जुगाड़ लगाते हुए साइकिल पर एक बोरी बांध रखा है. इसी बोरी में विकलांग बच्ची बैठी या यूं कहें कि सिकुड़ी हुई है. Also Read - आर्थिक गतिविधियों को बंद करने से पहले रूपरेखा तैयार करके समीक्षा करनी चाहिए थी : यामाहा

यह बोरी सफेद रंग की है. इस बोरी से मासूम बच्ची बाहर की तरफ झांकती दिख रही है. तस्वीरें इतनी मार्मिक हैं कि इन्हें देखने के बाद एक पल भावुक तो अगले ही पल सिस्टम के खिलाफ रोष व्यक्त करने लगेंगे. इस साइकिल में मजदूर पिता ने खाने के सामान भी बांध रखे हैं साथ ही एक बच्ची पिता के साइकिल को धक्का लगा रही. यह तस्वीरें बेहद मार्मिक और आपको भावुक करने वाली हैं. बच्ची का यूं बोरी में लटके रहना कई रोगों का कारण बन सकता है लेकिन प्रवासी मजदूर भी तो मजबूर ही हैं. Also Read - IRCTC 200 Trains List and Stoppage Between Stations: कल से चलेंगी 200 ट्रेन, देखें किस गाड़ी का कहां पर कितनी देर है स्टॉपेज