लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि उनकी सरकार ओबीसी कोटा से जाटों को आरक्षण देने के पक्ष में है. राजधानी में बीते दिनों हुई एक बैठक में बीजेपी के जाट समाज प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि उनकी सरकार जाट आरक्षण के लिए दृढ़ता से प्रयास करेगी. बता दें कि जाट के लिए आरक्षण का विरोध करने वाली एक याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित है.

 

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम योगी ने आरोप लगाया कि पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार ने जाटों को आरक्षण न मिले, इसके लिए कोर्ट में मुकदमा कराया. हमने कोर्ट में रिकाउन्‍टर दाखिल किया है. जाट व अन्‍या जातियों को आरक्षण देने के लिए सरकार ने सामाजिक न्‍याय समिति का गठन किया है. इससे पहले फतेहपुर सीकरी के सांसद चौधरी बाबूलाल ने यह कहकर सकते में डाल दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्‍यक्ष अमित शाह से मांग करने के बावजूद जाटों को आरक्षण नहीं मिला. और न ही मुजफ्फरनगर में हुए दंगों में उन पर मुकदमे वापस हुए. उन्‍होंने एसटी-एससी एक्‍ट में संशोधन का विरोध करते हुए कहा कि भाजपा को अपने गोद के बच्‍चे की जगह पेट की चिंता ज्‍यादा है.

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सीएम ने की जाट समुदाय के शौर्य की तारीफ
सीएम योगी ने कहा कि जाट महापुरुषों का सम्मान तक नहीं किया गया जबकि वे भारत रत्न के लायक थे. मुख्यमंत्री ने जाट समुदाय के शौर्य की तारीफ करते हुए कहा कि दिल्ली पर मुगलों और अंग्रेजों का शासन रहा, लेकिन उसके निकट पश्चिम यूपी में रहने वाले जाटों ने कभी अपने धर्म और संस्कृति पर आंच नहीं आने दी. पश्चिमी यूपी में 92 फीसदी जाट किसान है. उसने प्रदेश को नहीं पूरे देश को बताया कि खेती से आत्मनिर्भर नहीं, बल्कि अपने को संपन्न कैसे बनाया जाता है. जाटों ने समाज को नेतृत्व दिया है. राजा सूरजमल, सर छोटू लाल, चौधरी चरण सिंह और महेन्द्र सिंह टिकैत सरीखे महापुरुषों ने समाज को दिशा दी.

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देश को अस्थिर करना चाहता है महागठबंधन
मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्तूबर के अंत तक गन्ना किसानों के सभी बकायों का भुगतान कर दिया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि महागठबंधन चाहने वाले लोग राजनीतिक अपरिपक्वता से देश को अस्थिर करना चाहते हैं. वे चाहते हैं कि देश पाकिस्तान और चीन के आगे घुटने टेक दे.