लखनऊ: प्रदेश की जनता को मिली मोबाइल मेडिकल सेवा विभिन्न संक्रामक और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे प्रदेश के दूरदराज के इलाकों तक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के दृष्टिगत प्रदेश सरकार ने 170 नेशनल मेडिकल मोबाइल यूनिट (एनएमएमयू) के संचालन की स्वीकृति दी है यह नेशनल मेडिकल मोबाइल यूनिट 41 जिलों में पीपीपी मोड पर चलेंगी, साथ ही जेईई और एईएस प्रभावित जिलों में उनका संचालन प्राथमिकता से किया जाएगा. Also Read - कुछ ऐसे जुड़ी हुईं जन्मीं ये दो बच्चियां, तस्वीरें देख इस एक बात से डॉक्टर भी हैरत में

10 हज़ार जरुरतमंदो को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य  Also Read - कहीं आप Used Condom का इस्‍तेमाल तो नहीं कर रहे हैं, अब हो जाएं सावधान

शासन के प्रवक्ता के अनुसार- परियोजना के मेडिकल मोबाइल यूनिट वाहनों, उपकरणों की खरीद, मानव संसाधन की उपलब्धता और संचालन निजी सेवा प्रदाता करेंगे. यह योजना 7 साल की होगी एक यूनिट में वाहन ड्राइवर, डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स, लैब टेक्नीशियन की व्यवस्था की जाएगी. इन मोबाइल यूनिट के माध्यम से प्राथमिक उपचार, संक्रामक व गैर संक्रामक बीमारियों की स्क्रीनिंग बेसिक लैब टेस्टकी सेवाएं दी जाएंगी एनएचएम के निदेशक पंकज कुमार ने बताया कि इस सेवा के तहत एंबुलेंस दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराएंगे। इस योजना से रोजाना 10000 तक रोगियों को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.
ध्यातव्य है कि 22 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में अभी भी स्वास्थ्य व चिकित्सा सुविधाएं आम लोगों की पहुंच से बाहर है. सरकार के अथक प्रयासों के बावजूद भी अभी दूरदराज के सभी लोगों तक प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध करा पाना संभव नहीं हो पा रहा है सरकारी व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार मनमानेपन बढ़ती असंवेदनशीलता और गैर जिम्मेदारी के कारण तमाम योजनाएं अपने कार्य रूप में परिणित नहीं हो पाती हैं और उनका लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पाता है. पिछली सरकार के कार्यकाल में भी 108 एंबुलेंस सेवा की बड़ी जोर शोर से घोषणा की गई थी और उसका काफी प्रचार-प्रसार भी किया गया लेकिन आज स्थिति यह है कि आवश्यकता पड़ने पर उनका फोन नहीं उठता कभी डॉक्टर मौजूद नहीं रहते तो कहीं एंबुलेंस में आधारभूत उपकरण ही नहीं मिलते और सूत्रों के मुताबिक बहुत सारी एंबुलेंस तो बिना इस्तेमाल में आए खराब हो रही है. Also Read - Brucellosis Precautions: चीन में नए वायरस का हमला, अब ब्रूसीलोसिस मचा रहा तहलका, जानें भारत में इससे बचने के क्या हैं उपाय

ग्रास रुट लेवल पर अभी काम बाकी हैं !

हर सरकार अपने समय में ऐसी तमाम योजनाएं लेकर आती है लेकिन प्रभावी कार्यान्वयन ना हो पाने और जरूरी इच्छाशक्ति की कमी के कारण अपना उद्देश्य खो देती है और आम आदमी की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आ पाता हालांकि संक्रामक बीमारियों से जूझ रहे जिलों को इस प्रकार की योजनाओं की अत्यधिक आवश्यकता है क्योंकि इनके द्वारा दूरदराज के सभी जिलों में चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाई जा सकती हैं हालांकि 22 करोड़ की आबादी वाले इस राज्य में इस तरह की योजनाएं जितनी ज्यादा से ज्यादा लाई जा सके उतना अच्छा होगा क्योंकि प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है और इसके लिए ग्रास रूट लेवल पर बहुत ज्यादा काम किए जाने की आवश्यकता है.