नई दिल्ली/लखनऊ. हाल में आई फिल्म ‘बरेली की बर्फी’ से पहले ‘मेरठिया गैंगस्टर’, ‘मशान’, ‘तेवर’… और न जाने कितनी फिल्में हैं जो हमें और आपको सिल्वर स्क्रीन पर उत्तर प्रदेश को दिखाती हैं. अमिताभ बच्चन, प्रियंका चोपड़ा, नवाजुद्दीन सिद्दिकी, कैलाश खेर और न जाने कितने कलाकार हैं जिनके चेहरे पर्दे पर यूपी की याद दिलाते हैं. फिर भी यूपी में ज्यादा फिल्में क्यों नहीं बनती हैं. बनती भी हैं तो वह भोजपुरी की ज्यादा. ऐसे तमाम सवालों पर शायद यूपी सरकार भी सोच रही है. इसलिए यूपी इन्वेस्टर्स समिट में फिल्म निर्माण पर भी सरकार का फोकस था. यही वजह भी रही कि फिल्म निर्माण से जुड़े बॉलीवुड के दिग्गज फिल्मकार इस समिट में पहुंचे और यूपी में फिल्म निर्माण और सिनेमा स्क्रीन की संख्या बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया.

एक-दो नहीं, बल्कि 16 करारों पर हुए हस्ताक्षर
यूपी में फिल्म क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने फिल्म निर्माताओं, निर्देशकों के साथ 16 सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए. यूपी इन्वेस्टर्स समिट के अंतिम दिन प्रदेश सरकार की ओर से सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के राज्य मंत्री नीलकंठ तिवारी ने दस्तखत किए. तिवारी ने निवेशकों को यूपी के फिल्म एवं मीडिया क्षेत्र की निवेश अनुकूल नीतियों का भरपूर लाभ लेते हुए भारी निवेश करने का निमंत्रण भी दिया. तिवारी ने समिट के तहत आयोजित ‘मीडिया एण्ड एण्टरटेनमेण्ट’ विषय पर हुए सत्र में कहा कि फिल्म नीति-2018 के तहत ऐसे विदेशी नागरिक, जिनके पूर्वज भारत के मूल निवासी थे तथा मारीशस, फिजी, सूरीनाम और हालैंड आदि देशों में रह रहे हैं, अगर भारतीय विषयों पर प्रदेश में फिल्म बनाते हैं तो उन्हें भी अनुदान दिया जाएगा.

बुंदेलखंड का किला है बेहतरीन शूटिंग लोकेशन. (फोटो साभारः फिल्मबंधुयूपी.कॉम)

बुंदेलखंड का किला है बेहतरीन शूटिंग लोकेशन. (फोटो साभारः फिल्मबंधुयूपी.कॉम)

 

दो-तिहाई शुटिंग यूपी में तो अनुदान 2 करोड़ तक
नीलकंठ तिवारी ने कहा कि यूपी में फिल्म शूटिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार हर स्तर पर निवेशकों की सहायता करेगी. जनपद स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में ‘फिल्म प्रमोशन एंड फेसिलिटेशन कमेटी’ का गठन किया गया है. यह फिल्म यूनिट की सुरक्षा व्यवस्था, शासकीय गेस्ट हाउस, पर्यटन अतिथि गृह में ठहरने की व्यवस्था देखेगी. साथ ही विभिन्न जनपदों में विभागों के स्तर पर आने वाली कठिनाइयों का भी फौरन समाधान करेगी. तिवारी ने कहा कि बॉलीवुड का 43 प्रतिशत राजस्व उत्तर भारत से आता है. हिन्दी फिल्में बनाने की परिकल्पना ही उत्तर प्रदेश से निकल कर आई है. सूचना विभाग के प्रमुख सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि प्रदेश की फिल्म नीति के अनुसार जिन फिल्मों की आधी या दो-तिहाई शूटिंग उत्तर प्रदेश में की गई हो उनके लिए प्रति फिल्म अनुदान की सीमा क्रमशः एक करोड़ तथा दो करोड़ रुपए तक रखी गई है.

सरकार की पहल को फिल्मकारों ने खूब सराहा
जाने-माने फिल्मकार और मुक्ता आर्टस के चेयरमैन सुभाष घई ने इस मौके पर कहा कि हिन्दी सिनेमा उत्तर प्रदेश का है. इसमें अनेक ऐसी प्रतिभाएं हैं जिन्हें अगर अवसर दिया जाए तो वे काफी बेहतर काम कर सकते हैं. फिल्मकार बोनी कपूर ने कहा कि उत्तर प्रदेश की आबादी 22 करोड़ है, जो विश्व में जनसंख्या के आधार पर छठा बड़ा देश जितना है. मगर इतने बड़े प्रदेश में मात्र एक हजार स्क्रीन्स ही हैं. प्रदेश में फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए थियेटर्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जाने की आवश्यकता है. उन्होंने प्रदेश में फिल्म निर्माण के अनुकूल माहौल बनाने में मदद के लिए ‘फिल्म बंधु’ की सराहना करते हुए कहा कि इससे फिल्में बनाने का रास्ता आसान हो गया है.

फिल्म निर्माण के लिए दुधवा नेशनल पार्क भी है खूबसूरत जगह. (फोटो साभारः फिल्मबंधुयूपी.कॉम)

फिल्म निर्माण के लिए दुधवा नेशनल पार्क भी है खूबसूरत जगह. (फोटो साभारः फिल्मबंधुयूपी.कॉम)

 

दर्जनभर नहीं, सैकड़ों स्पॉट हैं यूपी में फिल्म शूटिंग के लिए
उत्तर प्रदेश में फिल्मों की शूटिंग हमेशा से की जाती रही है. वहीं इस प्रदेश की संस्कृति पर भी बॉलीवुड फिल्में बनाता रहा है. उत्तर प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर फिल्म शूटिंग के लिए दर्जनभर स्थानों का उल्लेख किया गया है. इनमें आगरा, इलाहाबाद, बुंदेलखंड, चित्रकूट, दुधवा नेशनल पार्क, लखनऊ, मिर्जापुर, सारनाथ, सोनभद्र, वाराणसी और वृंदावन शामिल हैं. देखने में भले ये संख्या कम लगती हो, लेकिन इन क्षेत्रों में सैकड़ों ऐसे स्पॉट हैं जहां फिल्मों की शूटिंग के लिए शानदार लोकेशंस हैं. राज्य सरकार ने अब इन्हीं स्थानों पर फिल्म शूटिंग में सहयोग के लिए जनपद के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है.

फिल्मों को टैक्स फ्री कर इस उद्योग बढ़ावा देती है सरकार
ऐसा नहीं है कि उत्तर प्रदेश सरकार फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए अभी जागी है. पहले भी फिल्म निर्माण से जुड़े कारोबारियों को प्रदेश में उनकी फिल्मों को टैक्स फ्री करने का लाभ मिलता रहा है. इसमें हिन्दी के अलावा कई भोजपुरी फिल्में भी शामिल हैं. पिछले साल निर्माता जैगम इमाम की बच्चों की शिक्षा पर फिल्म ‘अलिफ’ को प्रदेश सरकार ने टैक्स फ्री किया था. इसके अलावा भी कई फिल्मों को प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ मिलता रहा है.

(इनपुट भाषा से भी)