नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. बीजेपी को हराने के लिए महागठबंधन की कवायद में जुटे अखिलेश का साथ पहले उनके चाचा शिवपाल यादव छोड़ा अब मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव ने भी शिवपाल यादव का समर्थन किया है. शनिवार को समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के मंच पर पहुंचीं अपर्णा यादव ने कहा, ‘यहां 24 राजनीतिक दलों की बैठक बुलाई थी. सब अगर एक साथ आएं तो वो एक शक्ति बन जाएगी. शक्ति को इक्ट्ठा करें और इस दल को बल में बदल दें. मैं चाहती हूं कि सेक्युलर मजबूत हो. मजबूती के साथ अपने लोकतंत्र को मजबूत करें.’ Also Read - भाजपा सरकार की न तो नीतियां सही हैं, नीयत, योगी राज में विकास का पहिया थम गया है : अखिलेश

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में अपर्णा सपा के चुनाव चिन्ह पर लड़ी थीं, लेकिन वह चुनाव हार गई थीं. भतीजे अखिलेश यादव से मनमुटाव के बाद पिछले दिनों शिवपाल यादव ने सपा से अलग होकर नए मोर्चे का गठन किया है. माना जा रहा है कि बीजेपी के साथ पर्दे के पीछे सांठ-गांठ के बाद उन्होंने सेक्युलर मोर्चे का गठन किया है. आगामी लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की संभावित गठबंधन को कमजोर करने के लिए बीजेपी ने शिवपाल यादव को आगे बढ़ाया है. हालांकि शिवपाल यादव कह चुके हैं कि वे बीजेपी के खिलाफ लड़ाई लड़ते रहेंगे. Also Read - दुष्कर्म की घटनाओं को लेकर अखिलेश यादव ने कहा- 'रोमियो स्क्वॉड' हुआ लापता, अब यही हाल 'मिशन शक्ति' का भी होगा

लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है. योगी सरकार शिवपाल पर मेहरबान है. पहले राज्य सरकार ने शिवपाल को मायावती का बंग्ला उन्हें आवंटित किया और जेड श्रेणी सुरक्षा देने की बात हो रही है. हालांकि मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव के चाचा शिवपाल यादव के साथ मंच साझा करने के बाद बीजेपी ने सवाल उठाए हैं. Also Read - Rajya Sabha Election: यूपी में राज्‍यसभा की रिक्त होने वाली 10 में से नौ सीटें जीत सकती है भाजपा, सपा को होगा भारी नुकसान

बीजेपी के प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने कहा कि अब समाजवादी प्रमुख अखिलेश यादव को जवाब देना चाहिए कि, आखिरकार अपर्णा किसके साथ जा रही हैं. सपा की ओर से बार-बार यह कहे जाने पर कि कुछ पार्टी बीजेपी की बी टीम है. इन आरोपों को लेकर मनीष शुक्ला ने कहा कि आजकल यह फैशन हो गया है. नेता और पार्टियां जब राजनीति में प्रासंगिक नहीं रह जाती हैं तो वे खुद को प्रासंगिक बनाने के लिए ऐसा बोलती हैं. देखने वाली बात होगी की क्या अपर्णा यादव सेक्युलर मोर्चे से चुनाव लड़ेंगी और अगर ऐसा होता है तो ये भी देखना दिलचस्प होगा कि वह कहां से चुनाव लड़ेंगी.