लखनऊ: रायबरेली में हुए न्यू फरक्का एक्सप्रेस दुर्घटना की प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि ट्रेन को एक पटरी से दूसरी पटरी पर जाने के लिए पथ प्रदर्शन करने वाली मैकेनिकल प्रणाली में कुछ दिक्कत आने के कारण ट्रेन को इसके संकेत नहीं मिले, जिसके कारण उसके डिब्बे पटरी से उतर गए. Also Read - दिल्ली-एनसीआर में रहने वालों के लिए एकीकृत व्यवस्था हो: सुप्रीम कोर्ट

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रेल संरक्षा आयोग की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि पॉइंट फैलियर (जहां ट्रेन पटरियां बदलती है वहां गड़बड़ी होना) के बावजूद न्यू फरक्का एक्सप्रेस को हरी झंडी दी गई जिस कारण वह पटरी से उतरी. घटना की जांच कर रहे आयोग ने सिफारिश की है कि पैनल की ओर से दिए जाने वाले कमांड पर यदि प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है तो उसे ‘फेल’ घोषित करने के लिए रेलवे को एक समय सीमा और प्रयास तय करने चाहिए. बता दें कि उत्तर प्रदेश में रायबरेली के पास 10 अक्टूबर को सुबह न्यू फरक्का एक्सप्रेस के पांच डिब्बे पटरी से उतर गए थे. दुर्घटना में पांच लोगों की मौत हो गई थी और करीब 30 लोग घायल हो गए थे.

रायबरेली: न्यू फरक्का एक्सप्रेस के 9 कोच पटरी से उतरे, 7 की मौत, कई घायल

लोको पायलट को इमरजेंसी ब्रेक लगाने की ट्रेनिंग देने की सिफारिश

रिपोर्ट में ना सिर्फ इंजीनियरिंग विभाग को दुर्घटना की जिम्मेदारी लेने को कहा गया, बल्कि सिग्नलिंग और टेलीकॉम विभाग को भी जवाबदेही लेने को बोला गया. रिपोर्ट में सिग्नलिंग सर्किट के साथ छेड़छाड़ रोकने के लिए जो कदम उठाए जाने जरूरी हैं, उन्हें भी सूचीबद्ध किया गया है. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ट्रेन चालकों (लोको पायलट) को बेहद आपात स्थिति में स्वतंत्र ब्रेक लगाने का प्रशिक्षण देने की भी सिफारिश की है. सूत्रों का कहना है कि आयोग की अंतिम रिपोर्ट कुछ महीने में आने की संभावना है जिसमें दुर्घटना के लिए विभागों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी.