लखनऊः उत्तर प्रदेश सरकार ने 26 ऐसे जिला अधिकारियों नोटिस जारी किया है जिनके जिलों में पराली जलाने पर काबू नहीं पाया जा सका है. उप्र के मुख्य सचिव आर.के. तिवारी ने जिलाधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनके क्षेत्रों में पराली जलाने के मामले क्यों बढ़े हैं, जबकि इस पर रोक लगाने का आदेश दिया गया था.

यह नोटिस मेरठ, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर, बागपत, हापुड़, शामली, फिरोजाबाद, हाथरस, आगरा, संभल, मुरादाबाद, बदायूं, ज्योतिबा फुले नगर, फरु खाबाद, कानपुर देहात, ललितपुर, बांदा, जालौन, कन्नौज, अमेठी, हमीरपुर, भदोही, चित्रकूट, महोबा और कुछ अन्य जिलों को दिया गया है.

पराली जलाने के मुद्दे पर उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिला मजिस्ट्रेट को सख्त निर्देश जारी किया है. निर्देश में कहा गया है कि इसकी वजह से राज्य में और राज्य से लगते अन्य क्षेत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है, इसीलिए इस पर रोक लगाएं. इससे पहले योगी सरकार ने राज्य के 10 जिलों के अधिकारियों को अपने जिलों में पराली जलाने की घटनाओं को लेकर 20 नवंबर तक रिपोर्ट जमा करने को कहा था.

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मथुरा, पीलीभीत, शाहजहांपुर, रामपुर, लखीमपुर खीरी, महाराजगंज, बरेली, अलीगढ़, जालौन व झांसी के जिलाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों को पराली जलाने पर 20 नवंबर तक रिपोर्ट जमा करने को कहा गया था. राज्य सरकार का यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के मद्देनजर आया था. सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर को हरियाणा, दिल्ली, पंजाब व उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को तलब किया था.

शीर्ष कोर्ट ने 6 नवंबर को उत्तर प्रदेश, हरियाणा व पंजाब सरकारों को सात दिनों के भीतर छोटे व सीमांत किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल सहायता देने को कहा था, जिससे पराली जलाने को रोकने में सहायता मिल सके.