गोरखपुर: अलीगढ़ जिला प्रशासन ने गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के निलंबित प्रवक्ता डॉक्टर कफील खान पर तामील किए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) की अवधि तीन महीने के लिए बढ़ा दी है. अलीगढ़ के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि करते हुए मंगलवार को बताया डॉक्टर कफील पर लागू रासुका की अवधि को तीन महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है, क्योंकि उन्हें रिहा किए जाने पर कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है. Also Read - दिल्ली-NCR के साथ रोहतक में भी हिली धरती, घरों से बाहर निकल आए लोग, यूपी के कई इलाकों में जोरदार आंधी-पानी

डॉक्टर कफील को गत दस दिसंबर को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोप में 29 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था. कफील को गत दस फरवरी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी थी, लेकिन आदेश के तीन दिन बाद भी जेल प्रशासन ने उन्हें रिहा नहीं किया था. Also Read - यूपी में कोरोना के 275 नए केस, संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 7,445 हुआ, बढ़ी मृतकों की संख्‍या

उसके बाद कफील के परिजन ने अलीगढ़ की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अवमानना याचिका दायर की थी. अदालत ने 13 फरवरी को फिर से रिहाई आदेश जारी किया था, मगर अगली सुबह जिला प्रशासन ने कफील पर रासुका के तहत कार्यवाही कर दी थी. उसके बाद से कफील मथुरा जेल में बंद है. Also Read - यूपी: मंदिर में पुजारी और बेटे का शव मंदिर में मिला, हत्या की आशंका

कफील के भाई अदील खान ने रासुका की अवधि बढ़ाए जाने के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस वक्त पूरे भारत में लॉकडाउन है. सारे कॉलेज, विश्वविद्यालय और यहां तक कि हवाई अड्डे भी बंद हैं, ऐसे में डॉक्टर कफील कैसे और कहां जाकर अशांति फैला सकते हैं? उन्होंने डॉक्टर कफील को राजनीति का शिकार बनाए जाने का अंदेशा जाहिर करते हुए कहा कि कफील को जेल में 102 दिन हो गए हैं लेकिन उनका अभी तक किसी हृदय रोग विशेषज्ञ से इलाज नहीं कराया गया है जबकि इस बारे में जेल प्रशासन से कई बार गुजारिश की जा चुकी है.

उन्होंने कहा कि आगरा जेल में 14 बंदी कोरोना संक्रमित पाये गये हैं. पड़ोस के ही जिले मथुरा की जेल की क्षमता 500 कैदियों की है और वहां इस वक्त 1750 बंदी रखे गये हैं. वहां भी कैदियों में संक्रमण फैलने की आशंका है. डॉक्टर कफील अगस्त 2017 में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में कथित रूप से ऑक्सीजन की कमी के कारण बड़ी संख्या में मरीज बच्चों की मौत के मामले को लेकर चर्चा में आए थे. इस मामले में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था.