मेरठ (यूपी): मेरठ के एक नामी प्राइवेट हॉस्पिटल में नर्सों द्वारा रेमडेसिविर इंजेक्शन चुराकर नीलाम किये जाने का मामला सामने आया है. नर्सों से अस्पताल में जिसे इंजेक्शन लगाने थे, उसे नहीं लगाए. फिर इन इंजेक्शनों के लिए कोरोना मरीजों के परिजनों को तलाशा, और जब कई ग्राहक मिल गए तो नीलामी कर बेचने की कोशिश की. जिस ग्राहक ने इस इंजेक्शन की कीमत 32 हज़ार तक लगाई, उसे इंजेक्शन देने की बात हो गई. इस इंजेक्शन की बाज़ार में कीमत 900 से 2000 तक ही है. पुलिस ने दो फर्जी लोगों को गिरफ्तार किया. दोनों मरीज के रिश्तेदार होने का नाटक कर रहे थे.Also Read - ओमीक्रोन: महाराष्ट्र में पहली बार बी.ए. 4 के चार और बी.ए.5 के तीन मामले सामने आए, पुणे में भी मिले मरीज

जानकारी के अनुसार, एक मरीज, शोभित जैन को उनकी गंभीर स्थिति के कारण इंजेक्शन लगाया जाना था. उन्हें तीन खुराक मिलीं लेकिन चौथी को दोनों नर्सों ने चुरा लिया. जब शोभित जैन की मृत्यु हुई, तो उन्होंने ग्राहकों की तलाश शुरू कर दी. और दवा की बोलियां लगाई. दवा की नीलामी सौदा 25,000 रुपये में हुई, लेकिन ये दोनों पुलिस के जाल में फंस गए. Also Read - महाराष्ट्र: उद्धव ठाकरे ने कोरोना को लेकर दी नसीहत, कहा- अभी खत्म नहीं हुआ संक्रमण, लोग...

मेरठ के एसएसपी अजय साहनी का कहना है कि हमारी टीम इस मामले की छानबीन कर रही है. इंजेक्शन की नीलामी 7 दिन तक चली जिसके बाद नर्सो ने उसे 32000 में बेचा. इंजेक्शन शोभित जैन के नाम पर दिया गया था, जिसकी अब मौत हो चुकी है. इस मामले में हमने आबिद खान और अंकित शर्मा को गिरफ्तार किया है. Also Read - देश में Omicron BA.4 की दस्तक, हैदराबाद में मिला पहला केस, वैज्ञानिकों ने कही ये बात

उन्होंने आगे कहा, ‘सौदा हो जाने के बाद, हमारी टीम अस्पताल पहुंची और इंजेक्शन लगाने के लिए कहा. जब नर्सों को पता चला कि यह पुलिस है जो दवा के लिए आई थी, तो उन्होंने भागने की कोशिश की. लेकिन हमने उन्हें पकड़ लिया. वहां तैनात छह सुरक्षा गार्ड ने दोनों को बचाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने उन्हें भी पकड़ लिया.” सभी गार्डस को भी गिरफ्तार कर लिया गया है.

एसएसपी ने कहा कि इन सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 147 (दंगा करना), 342 (आपराधिक साजिश), 353 (सार्वजनिक बल पर अपने कर्तव्य के निर्वहन से लोक सेवक को हिरासत में लेना या आपराधिक बल और 120 बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है. उनके खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और महामारी रोग अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं. इस बीच, अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि यह एक ‘अलग-थलग घटना’ थी और उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी. हालांकि, उन्होंने पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया.