लखनऊ : बीकेटी के उमरिया गांव में वन विभाग की जमीन को गांव के ही किसानों ने अवैध तरीके से जोत रखा है. वन विभाग के कर्मचारी  विभाग की जमीन पर वृक्ष लगाने पहुंचे तो अवैध कब्जेदारों ने उग्र होकर टीम पर हमला बोल दियाअवैध कब्जेदारों के इस हमले में कई वनकर्मी घायल हो गए और वन दरोगा का हाथ टूट गया. वन विभाग की तरफ से इंटौंजा थाने में अवैध कब्जेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है. उमरिया गांव से लगा वन विभाग का लगभग 250 हेक्टेयर वन क्षेत्र है, जिसके 50 हेक्टेयर हिस्से पर उमरिया और मुसपिपरी गांव के ही किसानों ने अवैध तरीके से कब्जा जमाया हुआ है.

ये है मामला
सरकारी जमीन पर जबरिया काबिज अवैध कब्जेदारों ने फिर से एक बार फिर सरकारी अमले को अंगूठा दिखाया है. मामला प्रदेश की राजधानी की बीकेटी तहसील का है जहां वृक्षारोपण के लिए पहुंचे वन विभाग के कर्मचारियों की टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया. दरअसल बीकेटी के उमरिया गांव में वन विभाग की जमीन को गांव के ही किसानों ने अवैध तरीके से जोत रखा है. बक्शी का तालाब रेंज के रेंजर आर सी भट्ट ने जानकारी देते हुए बताया कि अक्टूबर 2017  में राजस्व विभाग ने मेड़बन्दी करने के बाद वन क्षेत्र की जमीन से अवैध कब्जा हटवा दिया था. वन क्षेत्र की जमीन पर पिछले तीन दिनों से वृक्षारोपण का काम करवाया जा रहा था, लेकिन शुक्रवार को अचानक बड़ी संख्या में किसानो ने टीम पर हमला बोल दिया. इस घटनाक्रम में वन दरोगा मनोज सिंह गौतम का हाथ टूट गया और साथ ही चार अन्य कर्मी घायल हो गए. घायलों में वन रक्षक मुबारक अली, ड्राइवर और माली शामिल हैं.

पहले भी कब्ज़ा हटवाने का प्रयास किया गया है लेकिन अवैध कब्जेदारों के आगे प्रशासन हर बार बेबस हो जाता है. शुक्रवार को वन विभाग की टीम द्वारा पौधा लगाने के लिए गड्ढा खोदने का काम किया जा रहा था. सूत्रों के मुताबिक विवाद तब शुरू हुआ जब मुसपिपरी के ग्राम प्रधान के ससुर अमरकांत अवस्थी और उमरिया गांव का रहने वाला जमलू सैकड़ों गांव वालों को इकट्ठा कर वहां पहुंचा. भीड़ ने मौके पर उपद्रव शुरू कर दिया. अचानक हुआ ये हमला इतना उग्र था कि वन कर्मियों को भाग कर अपनी जान बचानी पड़ी. वन कर्मियों की तहरीर के बाद इटौंजा पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है.