नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मंगलवार को 15 वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. वह उद्घाटन सत्र के बाद अपने मॉरीशस के समकक्ष प्रविंद जगन्नाथ से बातचीत करेंगे. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ सोमवार को युवा प्रवासी भारतीय दिवस का उद्घाटन किया और कहा कि प्रवासी भारतीयों ने भारत और भारतीयों के बारे में दुनिया की धारणा को नाटकीय रूप से बदला है. मॉरीशस के प्रधानमंत्री जगन्नाथ सोमवार दोपहर यहां पहुंचे और विदेश राज्य मंत्री वी के सिंह ने उनकी अगवानी की. बाद में विदेश मंत्री स्वराज ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री से मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग को प्रगाढ़ करने समेत विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया.

ऐसा पहली बार होगा, जब यह तीन दिवसीय कार्यक्रम नौ जनवरी के बजाय 21 से 23 जनवरी को आयोजित किया जा रहा है, ताकि इस कार्यक्रम में पहुंचे लोग इलाहाबाद के कुंभ मेले में जा पाएं और यहां गणतंत्र दिवस परेड भी देख सकें. प्रधानमंत्री कार्यालय के एक बयान के अनुसार इस साल के प्रवासी भारतीय दिवस का विषय ‘नए भारत के निर्माण में प्रवासी भारतीयों की भूमिका’ है. मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे, जबकि नार्वे के सांसद हिमांशु गुलाटी विशिष्ट अतिथि होंगे. न्यूजीलैंड के सांसद कंवलजीत सिंह बख्शी ‘विशिष्ट अतिथि’ होंगे.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 23 जनवरी को समापन कार्यक्रम को संबोधित करेंगे. गौरतलब है कि प्रवासी भारतीय दिवस मनाने का फैसला 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था और पहला कार्यक्रम उस साल नौ जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुआ था. इस कार्यक्रम के लिए नौ जनवरी का चयन इसलिए किया गया था क्योंकि 1915 में इसी दिन महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे. बयान के अनुसार प्रवासी भारतीय दिवस अब हर दो साल पर मनाया जाता है. यह प्रवासी भारतीयों को अपनी जड़ों से फिर से जुड़ने के लिए एक मंच प्रदान करता है.

प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान प्रवासियों के बीच बांटी गयी पुस्तिका में पूर्व विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर को तत्कालीन विदेश मंत्री के रूप में दर्शाए जाने से हड़कंप मच गया. आयोजकों की ओर से प्रवासी भारतियों को बांटी गयी किट की पुस्तिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह के साथ ही पूर्व मंत्री एमजे अकबर की फोटो भी छपी हुई है . इससे विवाद उत्पन्न हो गया. इस दौरान कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि पुस्तिका काफी पहले प्रकाशित हो गयी थी, जिसके चलते बुकलेट में पूर्व विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर को तत्कालीन विदेश मंत्री के रूप में दर्शाये जाने की भूल हुई है.

गौरतलब है कि एम जे अकबर को मी टू अभियान के बाद यौन उत्पीड़न के मामले में इस्तीफा देना पड़ा था. वैसे अकबर ने इन आरोपों से इनकार किया था. प्रवासी भारतीय कार्यक्रम में बांटी गयी पुस्तिका में कवर पेज पर पीएम मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ ही एम जे अकबर की फोटो छपी थी. प्रवासी भारतीय दिवस कार्यक्रम में इस पुस्तिका के वितरण पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गयी. कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया, ‘‘मी टू के आरोपी को स्टार की तरह दिखाया गया? क्या उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है?’