वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वाराणसी-चंदौली की सीमा पर स्थित पड़ाव में एकात्मवाद के प्रणेता माने जाने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्थल संग्रहालय का लोकार्पण किया और यहां स्थापित पंडित जी की 63 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया. पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के ठीक सामने कुंड का निर्माण किया गया है, जिसमें दो फुट जल सदैव रहेगा, जिसे प्रतिमा की सुंदरता के लिए बनाया गया है. कुंड की खासियत यह है कि कुंड में जैसे ही दो फुट से ज्यादा पानी होगा, पानी फिल्टरेशन होकर एसटीपी के माध्यम से पुन: फाउंटेन से होकर कुंड में झरने के रूप में गिरेगा. Also Read - Covid-19 in India Update: 5290 लोग हुए कोविड-19 का शिकार, 162 की मौत, इस राज्य की स्थिति सबसे खराब

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जहां से पर्यटक एकात्म मानववाद के सिद्धांतों को आत्मसात कर विश्व भर में फैलाएंगे. देश में दीनदयाल उपाध्याय की यह सबसे बड़ी प्रतिमा है. इस स्मारक केंद्र में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और काल से संबंधित जानकारियां होंगी. उ.प्र. किसान गन्ना संस्थान में पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्थल का निर्माण कराया गया है. यहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, गोष्ठी सहित अन्य छोटे कार्यक्रमों के लिए एम्फी थिएटर का निर्माण कराया गया है. बीचों बीच लगभग एक गोलाकार स्थल बनाया गया है, जिसके चारों तरफ छह सीढ़ियां बनाई गई हैं, जिन पर व्हाइट और ग्रीन ग्रेनाइट लगाया गया है. एम्पीथियेटर से सटा ही चेंजिंग रूम है. पार्क ग्रीन ग्रास, फूलों और पौधों से सजाया गया है, जिससे स्मृति स्थल में घूमने आए पर्यटकों को सुकून मिले. पार्क में टहलने के लिए पाथवे बनाया गया है, जिसके किनारे ईंट से डिजाइन बनाई गई है.

 

प्रतिमा के सामने एक सेल्फी पॉइंट्स
पर्यटकों को लुभाने के लिए प्रतिमा के सामने एक सेल्फी पॉइंट्स बनाया गया है. पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्थल में इंटरप्रिटेशन वाल पर पंडित जी के विचारों और सिद्धांतों को कलाकृतियों के माध्यम से उकेरा गया है. साथ ही पंडित जी के कुछ चित्र भी बनाए गए हैं. मूर्तिकार राजेश भंडारी ने बताया कि “प्रतिमा के निर्माण से पूर्व उनकी जीवनी को स्टडी किया गया, जिससे उनके हाव-भाव और खड़े होने के तौर-तरीकों को परखा गया. इसके बाद एक डिजाइन तैयार की गई, जिसे विशेषज्ञों की टीम ने अप्रूव किया. प्रतिमा को 63 फुट ऊंचा बनाने के पीछे भी खास वजह है. सनातन परंपरा के अनुसार 9 के अंक को पूर्णांक माना जाता है. इस प्रतिमा के निर्माण में करीब छह माह लगे हैं. कई दर्जन मजदूरों के अथक परिश्रम से इस प्रतिमा को तैयार किया गया है.”

स्मृति स्थल के समीप ही पंडित जी ने ली थी अंतिम सांस
इस पूरे स्मृति स्थल को डिजाइन करने वाले आर्किटेक्ट आदित्य मित्र ने बताया कि स्मृति स्थल के निर्माण की परिकल्पना उस वक्त तैयार की गई, जब दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी मनाई जा रही थी. ऐसी मान्यता है कि यहीं पड़ाव के समीप ही उन्होंने अंतिम सांस ली थी. ऐसे में अंतिम पड़ाव के रूप में इसे यहां तैयार किया गया है. गौरतलब है कि गृहमंत्री और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पांच अगस्त, 2018 को चंदौली जिले में मुगलसराय स्टेशन को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन करने की घोषणा की थी. इस दौरान जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित दीनदयाल स्मृति स्थल की घोषणा करते हुए गृहमंत्री के हाथों शिलान्यास करवाया था. पड़ाव चौराहे पर गन्ना विकास संस्थान की करीब 3.67 हेक्टेयर जमीन पर दीनदयाल उपाध्याय के स्मृति स्थल निर्माण के लिए 74 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी.