वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार के 2019-20 के बजट में प्रति व्यक्ति आय, खपत और उत्पादकता बढ़ाकर अगले पांच साल में देश की अर्थव्यवस्था को पांच हजार अरब डॉलर तक पहुंचाने का खाका पेश किया है. पार्टी सदस्यता अभियान की यहां शुरुआत करते हुए मोदी ने देशवासियों से कहा कि उन्हें ‘पेशेवर निराशावादियों’ से सावधान रहने की जरूरत है. ऐसे लोगों की लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समाधान देने के बजाय सिर्फ आलोचना करने की आदत होती है. Also Read - 27 साल पहले सोलंग घाटी में नहीं था रोपवे, तब PM मोदी ने वहां की थी पैराग्लाइडिंग...

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अर्थव्यवस्था की तुलना केक से करते हुए मोदी ने कहा कि केक का आकार महत्वपूर्ण है. केक का आकार जितना बड़ा होगा लोगों को उतना ही बड़ा हिस्सा मिलेगा. इसलिए हमने भारत की अर्थव्यवस्था को पांच हजार अरब डॉलर का बनाने का लक्ष्य रखा है. अर्थव्यवस्था का आकार जितना बड़ा होगा यह देश में उतनी ही समृद्धि लाएगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर का उदाहरण देते हुए मोदी ने कहा कि जिन देशों ने विकासशील से विकसित होने की छलांग लगायी है वह प्रति व्यक्ति आय के आधार पर ही लगायी है. मोदी ने कहा कि भारत भी यह कर सकता है. यह लक्ष्य इतना मुश्किल नहीं है. जब प्रति व्यक्ति आय बढ़ेगी तो उससे उनकी क्रयशक्ति भी साथ में बढ़ेगी. इससे मांग में वृद्धि होगी. इस मांग की पूर्ति के लिए उत्पादन में वृद्धि होगी और सेवाओं का विस्तार होगा. इन सबसे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. प्रति व्यक्ति आय बढ़ने से बचत भी बढ़ेगी.

मोदी ने कहा कि कुछ लोग पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाए जाने के लक्ष्य पर भी सवाल उठाएंगे. मैं ऐसे लोगों को पेशेवर निराशावादी कहता हूं. यह लोग आम आदमी से दूर होते हैं और अगर आप उनसे समाधान मांगेंगे तो वह आपको संकट में डाल देंगे. उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के तरीकों पर बहस हो सकती है लेकिन पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य पर सवाल उठाना गलत है. देश को ऐसे निराशावादियों से सावधान रहने की जरूरत है. प्रधानमंत्री ने कहा कि शुक्रवार को पेश आम बजट में राशि आवंटन को लेकर बड़े-बड़े वादे नहीं किए गए लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को पांच हजार अरब डॉलर का बनाने के लक्ष्य को लेकर मार्गदर्शन किया गया है.