लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 नवंबर को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे. इस मौके पर देश की पहली जलपरिवहन परियोजना 1620 किलोमीटर लंबे वाराणसी-हल्दिया इनलैंड वाटर हाइवे का शुभारंभ भी प्रधानमंत्री करेंगे. साथ ही ‘नमामी गंगे कार्यक्रम’ के तहत एक परियोजना की भी आधारशिला रखेंगे.

 

बता दें कि बीते साढ़े चार साल में जब भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वाराणसी आए उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र में ही सभा की. पहली बार ऐसा होगा जब वह तीन संसदीय क्षेत्र को जोड़ने वाले स्थल पर सभा करेंगे. यह सभा वाजिदपुर में आयोजित की जा रही है. बाबतपुर मार्ग पर स्थित इस गांव के तीन तरफ वाराणसी, चंदौली एवं मछलीशहर संसदीय क्षेत्र जुड़ता है. इस सभा के जरिए प्रधानमंत्री न केवल पूर्वांचल के विकास का संदेश देंगे बल्कि एक साथ तीनों संसदीय क्षेत्र को भी मिशन 2019 के लिए साधेंगे. राजनीतिक रूप से पीएम की यह सभा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. लिहाजा पार्टी ने भी तैयारी शुरू कर दी है.

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सुरक्षा के मद्देनजर ग्रैंड रिहर्सल आज
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रामनगर के राल्हूपुर स्थित बंदरगाह और हरहुआ के रिंग रोड के पास वाजिदपुर सभा स्थल को एसपीजी ने अपनी निगरानी में ले लिया है. इस दौरान चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है. सुरक्षा के मद्देनजर ग्रैंड रिहर्सल आज यानी रविवार को किया जाएगा. इस दौरान बाबतपुर से रामनगर व हरहुआ तक हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग का भी रिहर्सल होगा.

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वाराणसी-हल्दिया इनलैंड वाटर हाइवे
बता दें कि करीब 36 साल बाद देश की पहली जलपरिवहन परियोजना मूर्त रूप लेने जा रही है. 1620 किलोमीटर लंबे वाराणसी-हल्दिया इनलैंड वाटर हाइवे का शुभारंभ 12 नवम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे. इनलैंड वाटरवेज अथारिटी के अधिकारियों की माने तो इस परियोजना से पांच राज्यों की व्यावसायिक गतिविधियों में न केवल तेजी आएगी बल्कि एक साथ पांच सौ से दो हजार टन मॉल की ढुलाई का काम जलपरिवहन के जरिए हो सकेगा.

1982 में जल परिवहन मंत्रालय ने शुरू किया था काम
बता दें कि 1982 में जल परिवहन मंत्रालय ने योजना पर काम शुरू किया था. मगर यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई. वर्ष 2014 में नये सिरे से इस पर काम शुरू हुआ और चार साल के बाद देश में पहली बार कंटेनर कार्गो शुरू होने जा रही है. इस परियोजना के लिए केन्द्र सरकार ने विश्वबैंक से करीब 5700 करोड़ रुपये की मदद ली गई है. योजना के पहले चरण में बनारस, साहेबगंज समेत पांच स्थानों पर बंदरगाह बनाने का काम चल रहा है. इनलैंड वाटर अथारिटी के वाइस चेयरमैन प्रवीर पांडेय के मुताबिक पहले चरण की योजना का काम लगभग पूरा हो चुका है. आने वाले दिनों में 1500 से दो हजार टन के कंटेनर कार्गों का संचालन होगा.