लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आईआईटी कानपुर में अनुसूचित जाति के एक सहायक प्रोफेसर के साथ अत्याचार करने के लिए इस संस्थान के चार प्राध्यापकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एसीएससी) के आदेश पर रोक लगा दी है.

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आयोग ने आईआईटी कानपुर की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई की थी. आईआईटी कानपुर ने चार प्राध्यापकों द्वारा प्रोफेसर एस. सदरेला के कथित उत्पीड़न की शिकायत की जांच की थी. इससे पूर्व भी अदालत ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने पर रोक लगाई थी, लेकिन साथ ही इसने आईआईटी कानपुर प्रशासन को इन प्रोफेसरों के खिलाफ कानून के मुताबिक अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की छूट दी थी. इसके बाद, प्रशासन ने इस मामले की जांच की और अपनी रिपोर्ट दाखिल की जिसके आधार पर आयोग ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया.

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राज्य सरकार एवं आयोग को चार सप्ताह के भीतर मांगा जवाब
अदालत ने आयोग को नोटिस जारी किया है और राज्य सरकार एवं आयोग को इस मामले में चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. उल्लेखनीय है कि आईआईटी कानपुर में वैमानिकी विभाग में सहायक प्रोफेसर एस. सदरेला ने चार प्राध्यापकों पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था और इनके खिलाफ एनसीएससी में मामला दायर किया था. न्यायमूर्ति पंकज मिताल और न्यायमूर्ति मुख्तार अहमद की पीठ ने इशान शर्मा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश पारित किया. (इनपुट एजेंसी)