Hatharas Gangrape: उत्तरप्रदेश के हाथरस में एक दलित लड़की के साथ चार युवकों ने हैवानियत की हद पार करते हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया. पीड़िता की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई और उसकी जीभ भी काट दी गई थी. जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ती हुई पीड़िता ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मंगलवार की सुबह दम तोड़ दिया था.Also Read - Prayagraj Students Beaten Entering Hostel: प्रयागराज में पुलिस ने हॉस्टल में घुसकर छात्रों को पीटा, अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी ने CM योगी को घेरा

उसकी मौत के बाद पुलिस के बयान सवालों के घेरे में है. पुलिस ने परिजनों की इजाजत के बगैर ही पीड़िता के शव का रात में ही आनन-फानन में संस्कार भी कर दिया. पुलिस का कहना है कि उसके साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था. इस घटना के बाद लोगों का गुस्सा चरम पर है. Also Read - UP Police HO Recruitment: यूपी पुलिस में हेड ऑपरेटर के पद पर आई बंपर भर्ती, आवेदन शुरू, जानें कैसे करें आवेदन

पुलिस के बयान पर पीड़िता की मां ने कहा कि जब मैंने अपनी बेटी को पाया तो देखा उसके शरीर से बहुत खून बह रहा था. मैंने उसे अपने दुपट्टे और उसी खून से लथपथ कपड़े से उसे ढंक दिया. बेटी की जीभ कटी हुई थी. उन्होंने उस बयान को भी खारिज कर दिया, जिसमें हाथरस पुलिस ने कहा था कि पीड़िता की जीभ नहीं कटी थी. पीड़िता की मां ने कहा कि पुलिस झूठ बोल रही है. Also Read - UP Police Recruitment 2022: यूपी पुलिस में 2,430 पदों पर बंपर भर्ती, आवेदन की प्रक्रिया आज से शुरू

पीड़िता की मां ने बताया कि जब हमने अपनी बेटी को देखा तो हम एकदम सदमे की स्थिति में थे. हमारी बेटी बेहोश थी. हमारी बेटी ने अपने भाइयों के कानों में से एक आरोपी का नाम लिया और बेहोश हो गई. हमने सोचा कि गांव के लड़के ने उसकी पिटाई की है.

बता दें कि पीड़िता के कपड़े खून से लथपथ थे. युवती करीब 3 बजे उसी कपड़ों में अलीगढ़ अस्पताल पहुंची. अलीगढ़ अस्पताल के मुताबिक पीड़िता को रात में लाया गया था और उनके शरीर से खून नहीं निकल रहा था.

वहीं, पीड़िता के भाई ने कहा कि पुलिस ने दीदी के लिए एंबुलेंस भी नहीं मंगाई थी. बहन जमीन पर लेटी हुई थी. पुलिसवालों ने कह दिया था कि इन्हें यहां से ले जाओ. ये बहाने बनाकर लेटी हुई है. FIR के लिए हमें 8-10 दिन तक इंतजार करना पड़ा था. रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद पुलिस एक आरोपी को पकड़ती थी और दूसरे को छोड़ देती थी. धरना-प्रदर्शन के बाद आगे की कार्रवाई हुई और आरोपियों को घटना के 10-12 दिन बाद पकड़ा गया.