लखनऊ: रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में एक नई राजनीतिक पार्टी के गठन की घोषणा की. बता दें कि राजा भैया कुंडा से निर्दलीय विधायक हैं. राजा भैया की गिनती प्रदेश के बाहुबली नेताओं में की जाती है. नई पार्टी के गठन के अवसर पर राजा भैया ने कहा उनकी पार्टी अगामी लोकसभा चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि यह उनके समर्थकों की लंबे समय से मांग थी. हालांकि अभी पार्टी के नाम की घोषणा नहीं हुई है. उन्होंने मीडिया से कहा कि पार्टी के नाम की घोषणा बाद में की जाएगी.

एससी/एसटी अधिनियम की निंदा
यह ऐलान राजनीति में अपने प्रवेश के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे एक समारोह के दौरान किया. राजा भैया कुंडा से लगातार छह कार्यकाल के लिए चुने गए हैं. राजा भैया ने कहा कि उनके पार्टी के झंडे में पीला रंग ऊपर व हरा रंग नीचे होगा. उन्होंने एससी/एसटी अधिनियम की निंदा की और कहा कि लोग इसके प्रावधानों से असहज हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या किसी राजनीतिक दल से गठजोड़ करेंगे, राजा भैया ने कहा कि वह अभी किसी राजनीतिक समूह से तालमेल के मूड में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि वह उपयुक्त समय पर फैसला लेंगे. राजा भैया भाजपा शासन में कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्ता, राजनाथ सिंह के मंत्रिमंडल में व सपा शासन में मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव के कार्यकाल में मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे हैं.

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छठी बार निर्दलीय विधायक चुने गए
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के कुंडा से निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने शुक्रवार को लखनऊ में अपनी नयी पार्टी का औपचारिक ऐलान करते हुए कहा कि एससी/एसटी कानून और पदोन्नति में आरक्षण का विरोध पार्टी का मुख्य मुद्दा होगा. उनकी पार्टी का नाम जनसत्ता पार्टी हो सकता है. उन्होंने बताया कि जनसत्ता पार्टी, जनसत्ता लोकतांत्रिक पार्टी और जनसत्ता दल तीन नाम चुनाव आयोग को भेजे गए हैं. पार्टी के चुनाव चिह्न के लिए भी आयोग को पत्र लिखा गया है. आयोग ने अभी तक दोनों में से किसी पर मंजूरी नहीं दी है.

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अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान शुक्रवार को राजा भैया ने कहा कि वह लगातार छठी बार निर्दलीय विधायक चुने गए हैं. क्षेत्र की जनता की मांग पर वह अब अपनी पार्टी बना रहे हैं. पार्टी जल्द ही रैली आयोजित करेगी. उन्होंने कहा कि चूंकि पार्टी के नाम और चिह्न पर फैसला नहीं हुआ है, ऐसे में लोकसभा चुनाव, 2019 लड़ने पर अभी कुछ तय नहीं हुआ है.‘एससी-एसटी कानून’ पर केंद्र को घेरते हुए राजा भैया ने कहा कि यह कदम न्यायोचित नहीं है. इस तरह के मामले में पहले विवेचना, फिर गिरफ्तारी होनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘मैं दलित विरोधी नहीं हूं. उनका हिमायती और हमदर्द हूं. लेकिन, साथ ही एससी-एसटी कानून की आड़ में अगड़ी जातियों के उत्पीड़न के खिलाफ हूं.’’ (इनपुट एजेंसी)