सीनियर IPS की लीडरशिप में दोबारा बनाएं SIT, राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में SC का आदेश
राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच के लिए सरकार ने 13 जून को SIT बनाई थी. इसमें लखनऊ कमिश्नर विजय विश्वास पंत (IAS), IG लखनऊ रेंज किरण शिवकुमार और यूपी फाइनेंस एंड अकाउंट्स सर्विस के विशेष सचिव (वित्त) नीलरतन कुमार शामिल हैं. SIT ने 23 जून को अपनी जांच रिपोर्ट एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय प्रसाद को सौंपी थी.
अयोध्या में राम मंदिर के लिए 5 अगस्त 2020 को भूमि पूजन हुआ था. 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी. (PTI)
- राम मंदिर चढ़ावे से हुई चोरी 200 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का अनुमान
- रामलला की पादुका, सोने की प्रतिमा और हीरों का हार भी गायब
- अब तक तमाम सेवादारों से SIT ने की 20 करोड़ रुपये की रिकवरी
- 23 जून को SIT ने यूपी सरकार को सौंपी थी प्राइमरी रिपोर्ट
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार (20 जुलाई को) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने दोबारा SIT बनाने को कहा है. अदालत ने कहा कि किसी सीनियर IPS अधिकारी की अगुवाई में मामले की जांच कर रही SIT का पुनर्गठन किया जाए. सरकार की तरफ से मामले की पैरवी कर रहे सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि मामले में स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल की गई है. उन्होंने कोर्ट को ये भी बताया कि इस मामले की जांच जारी है. अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने सॉलिसिटर जनरल (SG) से पूछा कि क्या इस मामले में अभी जांच कौन कर रहा है? इस पर SG ने कहा, “सच्चाई का पता लगाने के लिए SIT बनाई गई थी. अब पुलिस इसकी जांच कर रही है. SIT ने पाया है कि यह एक कॉग्निज़ेबल ऑफ़ेंस है." कॉग्निज़ेबल ऑफेंस यानी ऐसा अपराध, जिसमें पुलिस बिना वॉरन्ट के गिरफ्तार कर सकती है.
CJI सूर्यकांत ने कहा, "हम 3-4 दिन बाद इस मामले पर सुनवाई करेंगे और जांच के पहलू पर गौर करेंगे." उन्होंने कहा, "अदालतें राजनीति की जगह नहीं हैं. यह अपराध का एक साधारण मामला है. हमें बस यह सुनिश्चित करना है कि जांच ठीक से हो." CJI ने आगे कहा, "यह सीधे-सीधे अपराध को अंजाम देने का मामला है; हम यहां केवल इसकी उचित जांच सुनिश्चित करने के लिए हैं."
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला कैसे सामने आया?
- 7 जून को सपा सरकार में मंत्री रहे पवन पांडेय ने राम मंदिर के चढ़ावे से 5 से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी के आरोप लगाए.
- 8 जून को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया. उन्होंने कोर्ट से इस मामले पर संज्ञान लेने की अपील की.
- 9 जून को BJP नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को एक लेटर लिखा. उन्होंने PM से इस मामले में CBI और ED से जांच की मांग की.
- 9 जून को ही राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने ट्रस्ट के सदस्यों के साथ मीटिंग की. इसमें चढ़ावे की गिनती पर चर्चा हुई.
- 10 जून के PMO ने राम मंदिर ट्रस्ट से इस मामले पर रिपोर्ट मांग ली. हालांकि, चंपत राय ने चढ़ावा चोरी के सभी आरोपों से इनकार किया.
- 11 जून के मंदिर के पूर्व अकाउंटिंग इंचार्ज महिपाल सिंह ने CCTV फुटेज को लेकर सवाल उठाए.
- 13 जून को यूपी सरकार ने इस मामले की जांच के लिए SIT बना दी.
किन-किनके खिलाफ दर्ज हुई FIR?
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में दर्ज हुई FIR में रमाशंकर यादव (टिन्नू यादव), लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष और करुणेश के नाम हैं. इनके खिलाफ गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धाराएं लगाई गई हैं.
किन धाराओं में केस दर्ज हुआ और कितनी हो सकती है सजा?
- राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में इन 8 नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराएं लगाई गई हैं. धारा 306 के तहत कर्मचारी या सेवक की गई चोरी को अपराध माना जाता है. इस धारा में दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है.
- BNS की धारा 316(5) गंभीर विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) से जुड़ी है, यह तब लागू होती है, जब किसी को सौंपी गई संपत्ति का गलत इस्तेमाल किया जाता है. इस अपराध में उम्रकैद या 10 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है.
- मामले में धारा 317(4) BNS भी शामिल है. यह धारा चोरी की संपत्ति को बार-बार अपने पास रखने या उसके कारोबार से संबंधित मामलों पर लागू होती है. इसके तहत भी उम्रकैद या 10 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है.
धारा 317(5) BNS चोरी की संपत्ति को छिपाने या ठिकाने लगाने में मदद करने वालों पर लगाई जाती है. इस अपराध के लिए 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजा के रूप में दिए जा सकते हैं.
- इसके साथ ही धारा 61 BNS के तहत आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) का आरोप भी लगाया गया है. इस धारा में सजा उस मूल अपराध की गंभीरता के अनुसार तय की जाती है, जिसकी साजिश रची गई हो.
- इन सभी 8 लोगों पर धारा 3(5) BNS भी लागू है, जो संयुक्त जिम्मेदारी से संबंधित है. अगर कई लोग मिलकर अपराध करते हैं, तो सभी आरोपियों पर समान रूप से जिम्मेदारी तय की जाती है. उन्हें उसी आधार पर सजा दी जा सकती है.
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