नई दिल्ली: कांग्रेस के सीनियर नेता और पार्टी के प्रमुख मुस्लिम चेहरा सलमान खुर्शीद अपने उस बयान पर कायम हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि कांग्रेस के हाथ भी मुस्लिमों के खून से सने हैं. उन्होंने कहा कि मैंने जो पहले कहा, उसे आगे भी लगातार कहता रहूंगा. मैंने यह बयान एक इंसान होने के नाते दिया है. सलमान के बयान के बाद से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं. अब पार्टी सीधे बीजेपी के निशाने पर आ गई है.

यूपी अलीगढ़ में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में सोमवार को खुर्शीद एएमयू के एक पूर्व छात्र के सवाल के जवाब में कहा था कि उनकी पार्टी के हाथ मुस्लिमों के खून से रंगे हैं. खुर्शीद ने कहा था, ”मैं कांग्रेस का हिस्सा हूं इसलिए मैं स्वीकार करता हूं कि हमारे हाथ मुस्लिमों के खून से सने हैं. मैं आपको ये बता रहा हूं कि हम अपने हाथों में खून दिखाने को तैयार हैं. आप भी उनमें हैं, जिनके हाथों में धब्बे हो सकते हैं. अपने इतिहास से कुछ सीखे और अपने लिए ऐसी स्थिति मत पैदा करो, जहां आप यदि 10 साल बाद एएमयू आते हैं तो कोई आपसे सवाल करे”

एएमयू के एक पूर्व छात्र ने कांग्रेस से सीनियर खुर्शीद से सवाल किया था कि 1947 में आजादी के बाद ही 1948 में एएमयू एक्ट में पहले संशोधन, 1950 प्रेसिडेंशल ऑर्डर में मुस्लिम दलितों से एसटी/एससी आरक्षण का हक छिना गया. इसके बाद हाशिमपुरा, मलियाना, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, भागलपुर, अलीगढ़ आदि में मुस्लिमों के नरसंहार, बाबरी मस्जिद के दरवाजे खुलना और फिर बाबरी मस्जिद विध्वंस कांग्रेस की सत्तारूढ़ नरसिम्हा राव सरकार में हुआ. इन घटनाओं का हवाला देते हुए पूर्व छात्र ने खुर्शीद से पूछा था कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के जो इतने सारे धब्बे हैं, इनको आप किन शब्दों से धोना चाहेंगे?

महाभियोग नोटिस के दौरान झलकी थी नाराजगी
बीते 23 अप्रैल को कांग्रेस नेता और पूर्व विधि मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा था कि सीजेआई दीपक मिश्रा को पद से हटाने के लिए महाभियोग का नोटिस देने की उन्हें जानकारी नहीं दी गई. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट परिसर में कहा था , मुझे इस समूची प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी। मैं उन लोगों की तरफ से कुछ भी नहीं कह सकता, जिन्होंने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन मेरी निजी राय में नोटिस को खारिज करने के फैसले को चुनौती दी जानी चाहिए”. (इनपुट- एएनआई)