नई दिल्ली. गोरखपुर लोकसभा की सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए फुल-प्रूफ प्लान बनाया है. वैसे तो सपा और बसपा का गठजोड़ राजनीतिक दृष्टि से राज्यसभा चुनाव के लिए होना बताया जा रहा है, लेकिन दोनों ही पार्टियां लगे हाथ ताजा गठबंधन के प्रभावों को गोरखपुर में भी भुना लेना चाहती है. इसके लिए जहां सपा की तरफ से भी तैयारियां की जा रही हैं, वहीं बसपा भी इस चुनाव के जरिए भाजपा के खिलाफ बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका तैयार कर रही है. यही वजह है कि आसन्न लोकसभा उपचुनाव में भाजपा को हराने के लिए गोरखपुर के बसपाइयों ने कमर कस ली है और गेम-प्लान बना लिया है, ताकि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी को पटखनी दी जा सके. Also Read - अजित पवार ने जनसंघ संस्‍थापक दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि दी, बाद में ट्वीट हटाया

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जीत के लिए जमीनी रणनीति पर काम कर रही बसपा Also Read - दशकों तक किसानों से खोखले वादे करने वाले अब उन्हीं के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं: पीएम मोदी

गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव के लिए सपा की तरफ से खड़े उम्मीदवार को बसपा के स्थानीय नेता सिर्फ ऊपरी तौर पर ही समर्थन नहीं दे रहे, बल्कि चुनाव में जीत के लिए जमीनी रणनीति पर काम किया जा रहा है. बसपा अपने कार्यकर्ताओं को दोनों पार्टियों के बीच हुए ‘गठबंधन’ का संदेश जमीनी स्तर पर पहुंचाने का निर्देश दे रही है. ताकि सपा को बसपा की तरफ से मिले ‘समर्थन’ का मर्म सभी कैडर मतदाताओं तक तय समय पर पहुंच जाए. पार्टी के कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक पहुंचने को कहा जा रहा है. इसकी निगरानी भी की जा रही है, जिसकी जिम्मेदारी बसपा के पूर्व सांसदों और विधायकों को दी जा रही है. ये सांसद और विधायक कार्यकर्ताओं को इस उपचुनाव में उनकी भूमिका और जिम्मेदारी के बारे में बताएंगे. साथ ही चुनाव में कैसे प्रचार करना है, यह भी बताएंगे.

उपचुनाव के लिए विधानसभावार जिम्मेदारी तय

बसपा ने गोरखपुर क्षेत्र में चुनाव रणनीति के तहत विधानसभावार जिम्मेदारियां तय कर दी हैं. सहजनवां, पिपराइच, कैंपियरगंज, गोरखपुर शहर और ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में बसपा के स्थानीय स्तर के कार्यकर्ता से लेकर पूर्व विधायकों और सांसदों को टीम लीडर बनाया गया है. पार्टी अपने सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले के तहत हर विधानसभा में पकड़ बनाना चाहती है, ताकि कहीं से भी नए ‘गठबंधन’ के उम्मीदवार की जीत को लेकर कोई संशय न रहे. इसलिए सहजनवां में पूर्व विधायक जीएम सिंह, सुरेश गौतम, प्रदीप निषाद समेत 20 लोगों की टीम बनाई गई है. इसी तरह पिपराइच में आफताब आलम, हरिप्रकाश निषाद, कैंपियरगंज में आनंद निषाद, नारद राव व परशुराम निषाद, गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्र में राजेश पांडेय सोनू, हरेंद्र यादव व रामदेव पासवान और गोरखपुर शहर विधानसभा में श्रीराम बाबू, संजय पांडेय व रामलौट निषाद को टीम लीडर बनाया गया है. इसमें गौरतलब यह है कि बसपा ने अपनी टीम में उन नेताओं को भी शामिल किया है जो हाल में पार्षद या विधायक या सांसद का चुनाव लड़ चुके हैं. इसके अलावा टीम में संगठन में विभिन्न पदों पर कार्यरत पदाधिकारियों को भी प्रमुखता दी गई है.

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सपा की जीत के लिए घर-घर पहुंचेंगे बसपा कार्यकर्ता

लोकसभा उपचुनाव में सपा प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए बसपा के कार्यकर्ताओं की टीम पूरी तरह मुस्तैद रहेगी. बसपा के आलाकमान ने पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि सपा प्रत्याशी की जीत के लिए वे मतदाताओं के घरों तक जाएं और प्रचार करें. दरअसल, गोरखपुर में किसी भी उम्मीदवार की जीत के लिए दलित वोट महत्वपूर्ण हैं. दलित वोटों पर बसपा की पकड़ मजबूत मानी जाती है. इसलिए सपा भी चाहती है कि बसपा के दलित वोट उसके पाले में आ जाएं. वहीं, उपचुनाव में सपा के उम्मीदवार को समर्थन देकर बसपा यह दिखाना चाहती है कि वह दलितों के साथ-साथ पिछड़ा वर्ग के लिए भी गंभीर है. इसलिए कार्यकर्ताओं को घर-घर तक पहुंचने के लिए कहा जा रहा है ताकि मतदाताओं को सपा और बसपा के एक होने की परिस्थितियों को समझाया जा सके.