नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के संत कबीरनगर में बीजेपी सांसद शराब त्रिपाठी द्वारा जूते से पीटे जाने के बाद बीजेपी विधायक राकेश सिंह बघेल ने न्याय के लिए प्रदर्शन शुरू कर दिया है. विधायक व उनके समर्थकों ने घटना का विरोध करते हुए संतकबीरनगर कलेक्ट्रेट घेर लिया है. डीएम से विधायक सांसद को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं. वहीं, भरी सभा में कैमरों के सामने हुई इस घटना को बीजेपी हाईकमान ने संज्ञान में लिया है. बीजेपी के यूपी अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. सांसद व विधायक को लखनऊ बुलाया गया है. दोनों पर कार्रवाई की जाएगी.

VIDEO: भरी सभा में सांसद ने विधायक को मारे जूते, जवाब में पड़े थप्पड़

बता दें कि आज उत्तर प्रदेश के संत कबीरनगर में बीजेपी सांसद व बीजेपी विधायक के बीच जूतमपैजार हो गई. संत कबीरनगर के बीजेपी सांसद शरद त्रिपाठी व बीजेपी विधायक राकेश सिंह में हुई बहस के बाद जूते थप्पड़ चल गए. शुरुआत सांसद शरद त्रिपाठी ने की. उन्होंने जूता उतार विधायक राकेश सिंह को मारना शुरू कर दिया. इसके बाद कुर्सी से उठे विधायक ने भी सांसद पर हमला बोल दिया. विधायक ने सांसद को थप्पड़ मारने का प्रयास किया. कुछ थप्पड़ मार भी लिए, विधायक कुछ और कर पाते तब तक अन्य लोगों ने दोनों को रोक लिया.


बताया जा रहा है कि संत कबीर नगर जिला मुख्यालय पर जिला योजना समिति की बैठक चल रही थी. जिले के तमाम अधिकारी यहां मौजूद थे. सांसद शरद त्रिपाठी व विधायक राकेश सिंह एक कुर्सी की दूरी पर थे. बीच में एक अन्य शख्स कुर्सी पर बैठे थे. इसी दौरान सांसद की विधायक से बहस हो गई. ऑडियो में सुना जा सकता है पहले औकात में रहने की बात कही गई इसके बाद सांसद शरद त्रिपाठी ने अपना जूता उतार विधायक को मारना शुरू कर दिया.

हाथ में कप लिए बीजेपी सांसद, दूसरी तस्वीर विधायक की है.

करीब 10 सेकंड तक वह विधायक को जूते मारते रहे. इसके बाद विधायक उठे और सांसद को भी मारने का प्रयास किया. सांसद ने फिर से जूते से पीटने की कोशिश की, विधायक ने सांसद को थप्पड़ मार दिए.


घटना के बीच मौजूद अन्य लोगों व पुलिस ने बीचबचाव किया. तब तक यहां मौजूद लोगों ने वीडियो बना लिए, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. बताया जा रहा है कि दोनों के बीच बहस किसी योजना के तहत हुए विकास कार्य के बाद शिलान्यास पट्टिका पर नाम दर्ज को लेकर भिड़ंत हुई. विधायक और सांसद में से किसी एक का नाम पट्टिका पर नहीं लिखा गया, जिसका गुस्सा इस घटना के रूप में सामने आया.