लखनऊ: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने प्रयाग में यमुना तट पर दलित साधु को महामंडलेश्‍वर बनाने की घोषणा की. बताया गया कि सनातन संस्कृति के स्‍वर्णीम इतिहास में किसी दलित को महामंडलेश्‍वर की उपाधि देने का अखाड़े का यह अब तक का पहला कदम है. अखाड़ा परिषद की ओर से कहा गया कि इस कदम से आने वाले कुंभ महोत्‍सव से पहले देश में सामाजिक गैर बराबरी और जातीय भेदभाव दूर करने में मदद मिलेगी.

उत्‍तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के थाना बिलरियागंज में गांव बरौनी दिवाकर पटटी के रहने वाले कन्‍हैया कुमार कश्‍यप ने साल 2016 में उज्‍जैन सिंहस्‍थ कुभ के दौरान संत की दीक्षा दी. उन्‍होंने कुंभ के दौरान पटियाला (पंजाब) में काली मंदिर स्थित जूना अखाड़े के महंत पंचानन गिरि महाराज से पहली बार संन्‍यास की दीक्षा ली थी. उस समय महंत पंचानन गिरि महाराज ने उनको नया नाम दिया-कन्‍हैया प्रभुनंद गिरि.

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सोमवार को हुई महामंडलेश्‍वर बनाने की घोषणा
कन्‍हैया कुमार से महंत प्रभुनंद गिरि तक का सफर तय करने वाले दलित साधु को सोमवार की शाम यमुना किनारे मौज गिरि आश्रम में पूर्ण सन्‍यास दिलाया गया. अब कन्हैया प्रभु सनातन धर्म से बिखरे दलितों और समाज को जोड़ेंगे, ताकि सब एक हो सके और सनातन धर्म का प्रचार करेंगे.

हर ओर चल रहा दलित कार्ड
मौजूदा समय में देश-प्रदेश हर ओर दलित कार्ड खेला जा रहा है. और तो और बीजेपी अध्‍यक्ष के रायबरेली दौरे के बाद से प्रदेश मके मंत्री और मुख्‍यमंत्री तक दलितों के यहां भोजन करने में जुटे हैं. सोमवार को प्रतापगढ़ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दलितों के घर खाना खाया. ऐसे में साधु-संत भी इसमें पीछे नहीं दिख रहे हैं. दलित साधु को महामंडलेश्वर बनाए जाने का फैसला कहीं न कहीं उसी की दिशा में उठाया गया एक कदम है. अखाड़ा परिषद के मुताबिक इतिहास में यह पहली दफा है जब किसी दलित समुदाय के साधु को महामंडलेश्वर की पदवी दी जाएगी. हालांकि इससे पहले आदिवासी समुदाय के कुछ साधुओं को महामंडलेश्वर बनाया जा चुका है. संत कन्हैया प्रभु फिलहाल गिरि पंजाब में रहते हैं.