नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सांसद अतीक अहमद के एक व्यापारी का अपहरण कराकर उसे जेल में लाने, उस पर हमला करने और उसे अपना कारोबार उसके नाम करने के लिए मजबूर करने की घटना का मंगलवार को संज्ञान लिया. न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एस के कौल ने घटना पर विचार किया और उत्तर प्रदेश सरकार से एक सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा.

शीर्ष अदालत वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने के अतिरिक्त जन प्रतिनिधियों से संबंधित मामलों पर तेजी से सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत का गठन करने की मांग की गई है.

उत्तर प्रदेश प्रशासन ने रियल एस्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल की प्राथमिकी पर हाल में देवरिया जेल में छापा मारा था. जायसवाल ने आरोप लगाया था कि उनका लखनऊ से अपहरण कर जेल ले जाया गया और अहमद और उनके सहयोगियों ने उन पर हमला किया और अपना कारोबार उनके नाम करने के लिए उन्हें मजबूर किया. अहमद को देवरिया जेल में रखा गया है.

अधिवक्ता स्नेहा कलीता के साथ न्याय मित्र विजय हंसारिया ने अदालत से कहा कि पूर्व सांसद के खिलाफ जघन्य अपराध के 20 से अधिक मामले हैं और उसके बावजूद उन्होंने व्यापारी का अपहरण कर जेल में लाने का दुस्साहस किया है.

लखनऊ के रियल एस्टेट कारोबारी जायसवाल ने आरोप लगाया कि उन्हें यातना दी गई और अपनी पांच कंपनियां पूर्व सांसद और जेल में बंद उनके बेटे के नाम करने पर मजबूर किया गया. बाद में राज्य सरकार ने पूर्व सांसद अहमद को बरेली जिला कारागार में स्थानांतरित करने का आदेश दिया.