सीतापुर : जनपद में एक दर्जन बच्चों के आवारा कुत्तों का निवाला बनने और 2 दर्जन से ज्यादा के घायल होने के बाद पुलिस, प्रशासन और आम लोग भी इस समस्या से निजात पाने के लिए अपने-अपने स्तर से प्रयासरत हैं. लगभग 2 दर्जन कुत्तों को आक्रोशित ग्रामीणों ने मौत के घाट उतार दिया है और लगभग 3 दर्जन कुत्तों को आधिकारिक टीम द्वारा पकड़ने में कामयाबी मिली है.

इसी बीच सीतापुर के मछरेहटा इलाके के गुरैनी गांव में आवारा कुत्तों ने बुधवार को फिर से हमला कर एक और बच्चे को घायल कर दिया. कुत्तों की धर-पकड़ तो चल ही रही है इसके साथ ही वैज्ञानिकों में कुत्तों का यह व्यवहार शोध का विषय बन गया है. सीतापुर में लखनऊ और बरेली के साइंटिस्ट के साथ-साथ दुधवा और पीलीभीत टाइगर रिजर्व के एक्सपर्ट भी पहुंच गए हैं. वहीँ अमेरिकी मीडिया ने भी सीतापुर का मामला प्रमुखता से उठाया है.

अमेरिकी मीडिया में छाया सीतापुर के आदमखोर कुत्तों का आतंक

हमलावर कुत्तों के डीएनए सैम्पल लिए गए
शोध टीम का कहना है कि हमलावर आवारा कुत्ते ही हैं या कोई जंगली जानवर या फिर ये कोई नई नस्ल है इस सम्बन्ध में शोध चल रहा है. टीम ने कई स्थानों का भ्रमण कर जानकारियां एकत्रित की, प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की और उन स्थलों को देखा जहां कुत्तों ने बच्चों पर हमला कर उन्हें मारा था.

बरेली के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान केंद्र के हेड साइंटिस्ट डॉक्टर दिनेश चन्द्र ने बताया कि अभी तक पकड़े गए कुत्तों के हाव-भाव का अध्ययन किया जा रहा है, साथ ही उनके डीएनए सैंपल भी ले लिए गए हैं. उनका कहना है कि उनकी टीम का प्रयास है कि उन कुत्तों का डीएनए सैंपल मिल जाए जिन्होंने हमला किया है. जिससे इस बात का पता लगाया जा सके कि हमला करने वाले कुत्ते किस प्रजाति के हैं. इस प्रकार की अफवाहें भी हैं कि हमलावर कुत्ते नहीं भेड़िया हैं, इस विषय पर डॉक्टर दिनेश चन्द्र का कहना है कि यह भी शोध का विषय है कि ये भेड़िया हैं या कुत्ता अथवा कहीं भेड़िये और कुत्ते के क्रास से किसी नई प्रजाति ने तो जन्म नहीं ले लिया है. उनका कहना है कि बिना रिसर्च अभी कुछ भी साफ़ तौर से नहीं कहा जा सकता है.

सीतापुर के आदमखोर कुत्तों ने 4 और मासूमो को बनाया शिकार, 2 बच्चों की मौत