देहरादून: छठ पूजा के दौरान महिलाओं को पैसे बांटकर कथित तौर पर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने के कारण विवादों में फंसे भाजपा विधायक गणेश जोशी ने शुक्रवार को इस मामले में अपना बचाव करते हुए कहा कि वह केवल युगों पुराने धार्मिक रिवाज को निभा रहे थे. उनका कहना है कि वो भाई (स्वयं ) के माथे पर टीका लगाने वाली बहनों को शगुन के तौर पर उपहार दे रहे थे. बता दें कि भाजपा विधायक का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें वो महिलाओं को रूपये बांटते नजर आ रहे हैं. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि ये सरासर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है.

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जिन्होंने टीका लगाया उन्हीं को रूपये दिए !
अक्सर विवादों में रहने वाले विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र मसूरी में छठ पूजा समारोह के दौरान महिलाओं को नोट बांटते दिखाई दे रहे अपने एक वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए जोशी ने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है और वह सिर्फ एक पुराने धार्मिक रिवाज को निभा रहे थे. जोशी ने कहा, ‘‘आपने वीडियो में देखा होगा कि मैं वहां मौजूद हर महिला की बजाय सिर्फ उन्हीं महिलाओं को नोट दे रहा हूं जो मेरे माथे पर टीका लगा रही हैं. जब बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं तो भाई उन्हें पैसे या उपहार देते हैं. यह रिवाज युगों से चला आ रहा है . इसमें गलत क्या है ?’’ उन्होंने कहा कि इसका आगामी नगर निकाय चुनावों से कोई संबंध नहीं है जैसा कि कांग्रेस आरोप लगा रही है.

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नोटिस मिलने पर देंगे जवाब
विधायक ने कहा, ‘‘कांग्रेस को आगामी निकाय चुनावों में अपनी हार साफ नजर आ रही है, इसलिए वह इस मामले में राई का पहाड़ बना रही है .’’ यह पूछे जाने पर कि क्या इस मामले में चुनाव आचार संहिता के कथित उल्लंघन को लेकर उन्हें राज्य निर्वाचन आयोग से कोई नोटिस मिला है, उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें ऐसा कोई नोटिस नहीं मिला है. जोशी ने कहा, ‘‘जब मुझे नोटिस मिलेगा तो मैं उसका जवाब दूंगा. जब मतदाताओं को लुभाने के लिए शराब बांटी जाती है तो कोई संज्ञान नहीं लेता लेकिन जब युगों पुराने एक रिवाज को निभाया जाता है तो लोगों को आपत्ति हो रही है.’’ गणेश जोशी का विवादों से पुराना नाता रहा है. वर्ष 2016 में भी भाजपा की रैली के दौरान पुलिस का घोड़ा ‘शक्तिमान’ घायल हुआ था और उन पर उसे मारने के आरोप लगे थे. रैली के दौरान घायल ‘शक्तिमान’ की बाद में मौत हो गई  थी. (इनपुट एजेंसी)