लखनऊ| उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े मामलों में पक्ष बनने का फैसला किया है. बोर्ड की गुरुवार को संपन्न हुई दो दिवसीय बैठक में सदस्यों ने अध्यक्ष वसीम रिजवी को अयोध्या मुद्दे से जुड़े अदालती मामले में हस्तक्षेप के लिए अपनायी जाने वाली प्रक्रिया पर फैसले के लिए अधिकृत किया. Also Read - बाबरी विध्वंस मामले में 24 मार्च को दर्ज होंगे आरोपियों के बयान

रिजवी ने कहा कि बोर्ड सदस्यों की राय है कि वक्फ मस्जिद मीर बकी, जिसे अयोध्या में बाबरी मस्जिद के लोकप्रिय नाम से जाना जाता है, बाबर के समय मीर बकी द्वारा बनवायी गयी शिया मस्जिद थी. मीर बकी शिया थे. रिजवी ने दावा किया कि इस तथ्य के अनुसार वह शिया मस्जिद थी. केवल मस्जिद के इमाम ही सुन्नी थे, जिन्हें शिया मुतवल्ली पारिश्रमिक देते थे और वहां शिया सुन्नी दोनों ही नमाज पढ़ते थे. Also Read - प्रस्तावित गर्भ गृह की मिट्टी का परीक्षण कराने के बाद ही शिलान्यास संभव: चंपत राय

बोर्ड सदस्यों के नजरिये से मीडिया को अवगत कराते हुए रिजवी ने कहा कि 1944 में सुन्नी बोर्ड ने मस्जिद अपने नाम से पंजीकृत करा ली थी, जिसे शिया बोर्ड में 1945 में अदालत में चुनौती दी थी लेकिन शिया बोर्ड मुकदमा हार गया. उन्होंने कहा कि इन वर्षों में किसी ने उक्त आदेश की समीक्षा के लिए उच्च न्यायालय या किसी अन्य अदालत में याचिका दायर नहीं की. Also Read - बाबरी मस्जिद के अवशेष पर दावा करने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी बीएमएसी

उन्होंने कहा, ‘‘अब मेरे पास आदेश की प्रति है और मुझे बोर्ड ने जिम्मेदारी दी है कि मस्जिद के स्वामित्व पर दावा पेश किया जाए.’’