नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के कानपुर में कुख्यात अपराधी विकास दुबे (Vikas Dubey) द्वारा 8 पुलिसकर्मियों के बाद पूरे देश में हलचल में मची हुई है. इस बीच शिवसेना ने भी इस हमले को लेकर अपने मुखपत्र सामना (Saamna) में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा है. शिवसेना ने सामना के संपादकीय में विकास दुबे (Gangster Vikas Dubey) के नेपाल भागने का भी शक जाहिर किया है. सामना के संपादकीय में लिखा है- ‘ऐसा ना हो कि विकास दुबे नेपाल भागकर नेपाल का दाऊद इब्राहिम बन जाए.’ शिवसेना ने सामना के संपादकीय में राज्य की एनकाउंटर लिस्ट में विकास दुबे का नाम शामिल ना हो पाने पर भी सवाल उठाए हैं और कहा कि ‘उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश कहा जाता है. लेकिन, अब उत्तम प्रदेश राज्य के पुलिसकर्मियों के खून से लथपथ हो गया है.’Also Read - UP: पुलिस सब- इंस्‍पेक्‍टर ने दिया इस्तीफा, अपनी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा है- ‘उत्तर प्रदेश सालों से राज्य में जारी गुंडागर्दी को लेकर बदनाम होते आ रहा है. वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने कई बार इस बात का दावा किया कि राज्य में गुंडागर्दी का अंत हो चुका है. लेकिन, कानपुर में हुई घटना ने एक बार फिर उनके दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य की पुलिस 8 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या के बाद अब इस मामले पर कड़ी कार्रवाई कर चुकी है और विकास दुबे की तलाश में जुटी है, लेकिन 2 जुलाई को विकास दुबे और उसके गुंडों ने जिस तरह से 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी. उससे देश बुरी तरह से हिल गया है.’ Also Read - UP में एनकाउंटर: आगरा में डॉक्‍टर के अपहरण में शामिल चंबल का कुख्‍यात बदमाश और उसका साथी मारा गया

‘गुंडों और पुलिस की मिलीभगत’ के कारण हुई घटना
अपने संपादकीय में सामना ने इस बात की ओर भी इशारा किया है कि राज्य में हुई इस दर्दनाक घटना में पुलिस की भी मिलीभगत थी. जिसके चलते 8 पुलिसकर्मियों की जान चली गई. दरअसल, इस घटना के बाद चौबेपुर पुलिस स्टेशन के प्रमुख विनय तिवारी को मुखबिरी के आरोप में निलंबित कर दिया गया है. इसकी जांच भी जारी है. सामना के संपादकीय के मुताबिक- ‘इससे प्रमाणित होता है कि विकास दुबे को पुलिस से कुछ जानकारी मिलेगी ही, लेकिन यह घटना इस बात का भी प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश में गुंडों और पुलिस में ‘मिलीभगत’ है.’ Also Read - UP Police SI ASI Recruitment 2021: यूपी पुलिस में इन पदों पर आवेदन करने की कल है अंतिम डेट, जल्द करें आवेदन, 45000 से अधिक मिलेगी सैलरी

शहीद पुलिसकर्मियों के ध्वस्त घरों का क्या?
सामना में शिवसेना ने शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को लेकर भी चिंता जाहिर की है. शिवसेना ने कहा- कानपुर शूटआउट के अगले ही दिन योगी प्रशासन ने हत्याकांड से नाराज होकर विकास दुबे के आलीशान घर को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया. कहा गया विकास दुबे का घर ‘अवैध’ था. अवैध घर को ध्वस्त कर दिया गया, ये सही ही हुआ, लेकिन ‘शहीद’ पुलिसकर्मियों के उद्ध्वस्त हो चुके घरों का क्या? उनकी पत्नियों के ‘सौभाग्य’, माता-पिता, बच्चों का क्या? इस घटना के बाद सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लोगों के मन में भी यह सवाल उठ रहा है.’

‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट सरकार बेनकाब’
शिवसेना ने इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ सरकार के बेनकाब होने की बात कही और उत्तर प्रदेश में घर-घर से विकास दुबे जैसे गुंडों के निकलने की आशंका जताई. शिवसेना ने कहा- विकास दुबे जैसा गुंडा कार्रवाई के लिए पुलिसकर्मियों पर सीधे फायरिंग करके उनकी हत्या कर देता है, अपने गुर्गों के साथ भाग जाता है. अगर यह ऐसे ही जारी रहा तो ‘घर घर से अफजल’ निकलेगा क्या, ये तो पता नहीं. लेकिन उत्तर प्रदेश में ‘घर घर से विकास दुबे’ निकल सकता है.’ शिवसेना के मुताबिक, आज कानपुर में जिस तरह से 8 पुलिसकर्मी मारे गए हैं, इससे कल लिस्ट बनानेवालों की जान भी खतरे में पड़ सकती है.