शिवपाल यादव बनाए जा सकते हैं नेता विरोधी दल या PDA के फॉर्मूले के तहत होगा फैसला, जानें यहां

उत्तर प्रदेश में विधानसभा का मानसून सत्र 29 जुलाई से शुरू हो रहा है. ऐसे में इस बात की संभावना बढ़ गई है कि सत्र शुरू होने से पहले समाजवादी पार्टी नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति कर सकती है.

Written by: Manoj Yadav
Published: July 25, 2024, 12:08 PM IST

उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 29 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जो 2 अगस्त तक चलेगा. मानूसन सत्र में राज्य सरकार विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश करेगी. माना जा रहा है कि अनुपूरक बजट में प्रयागराज के कुंभ को फोकस में रखकर लाने की तैयारी की जा रही है.

अखिलेश यादव के इस्तीफे के बाद खाली हुआ पद

उत्तर प्रदेश विधानसभा में फिलहाल नेता प्रतिपक्ष का पद खाली है. नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव के इस्तीफे के बाद से यह पद खाली है. अखिलेश यादव कन्नौज से सांसद चुन लिए गए तो उन्होंने विधायकी से इस्तीफा दे दिया जिसके बाद से यह पद खाली पड़ा हुआ है. ऐसे में विधानसभा के सत्र के समय नेता प्रतिपक्ष की भूमिका काफी अहम मानी जाती है. ऐसे में सवाल यह है कि समाजवादी पार्टी अभी तक नेता प्रतिपक्ष के नाम का ऐलान क्यों नहीं कर पा रही है, जबकि लोकसभा चुनावों में मिली जीत से उसके हौसले काफी बुलंद हैं. साथ में समाजवादी पार्टी के पास पीडीए का एक हिट फॉर्मूला भी है.

उत्तर प्रदेश में सपा का चेहरा होंगे नेता प्रतिपक्ष

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को इसके लिए फैसला लेना है. यह बिल्कुल साफ है कि नेता प्रतिपक्ष के लिए फैसला बहुत सोच-समझकर लिया जाएगा. नेता प्रतिपक्ष जो भी बनेगा, वह विधानसभा में समाजवादी पार्टी का चेहरा होगा. इसमें तीन नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं. इसमें जसवंत नगर के विधायक शिवपाल सिंह यादव, राम अचल राजभर और इंद्रजीत सरोज का नाम शामिल है. राम अचल राजभर, अकबरपुर से विधायक हैं और इंद्रजीत सरोज सपा के राष्ट्रीय महासचिव और कौशांबी जिले की मंझनपुर सीट से विधायक हैं.

PDA के फॉर्मूले में फिट बैठने वाले को मिल सकती है नियुक्ति

ऐसे में सवाल यह है कि इन तीन नामों में से कौन सा नाम ऐसा होगा, जो पीडीए के फॉर्मूले के तहत फिट बैठेगा. यह भी हो सकता है कि इन तीन नामों के अलावा कोई चौथा नाम भी सामने आ जाए, क्योंकि आजकल अखिलेश यादव बहुत चौंकाने वाले फैसले ले रहे हैं. अखिलेश यादव ने जिस तरह से सामान्य लोकसभा सीट फैजाबाद से एक दलित प्रत्याशी उतारकर उस सीट को जीतने में कामयाब रहे हैं, जिस सीट पर पूरी दुनिया की निगाहें लगी हुई थीं. अयोध्या की फैजाबाद लोकसभा सीट से जीतकर अवधेश प्रसाद ने इतिहास रच दिये. जिसके बाद भाजपा नेताओं की बोलती बंद हो गई है.

उपचुनाव में भाजपा को मात देकर सपा खींचनी चाहती है बड़ी लकीर

अगले महीने में उत्तर प्रदेश में विधानसभा के उपचुनाव भी हो सकते हैं. ऐसे में अखिलेश यादव कोई ऐसा फैसला लेंगे. जिसके जरिए चुनाव प्रचार के दौरान सूबे में एक संदेश दे सकें. उनके ऊपर परिवारवाद के आरोप लगते रहे हैं. इसलिए, यह कहा जा सकता है कि शायद शिवपाल यादव को नेता प्रतिपक्ष न बनाए जाए, नहीं तो भाजपा विधानसभा से लेकर उपचुनावों के दौरान इस बात का दुष्प्रचार करने और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की पूरी कोशिश करेगी.

किसी दलित चेहरे को मिल सकती है जिम्मेदारी

अब बचते हैं दो नाम जिनकी चर्चाएं चल रही हैं और साथ में एक चौथा नाम भी सामने आ सकता है जिसके नाम की कहीं कोई चर्चा नहीं है और यह नाम चौंकाने वाला हो सकता है. चौथा नाम जो सामने आ सकता है उसमें किसी मुस्लिम नाम की संभावना नहीं है, क्योंकि उससे पोलराइजेशन का खतरा बढ़ेगा. लेकिन किसी दलित के नाम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि अबकी बार के लोकसभा चुनावों में दलितों ने बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी को वोट दिया है. साथ ही दूसरी पार्टियों के दलित नेताओं से जो सपा को चुनौतियां मिल रही हैं, उनकी काट के लिए कोई दलिता चेहरा सामने आ सकता है.

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