वाराणसी: फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुअल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिगित मैक्रों को बनारस में खास पारंपरिक उपहार दिया जाएगा ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के डायरेक्टर डॉ रजनी कांत की देखरेख में कई कारीगरों ने तैयार  किया.
डॉक्टर रजनीकांत ने बताया कि हैंडलूम, जरदोजी, स्टोन आर्ट और गुलाबी मीनाकारी से जुड़ी 4 चीजें बतौर गिफ्ट दी जाएंगी. मुमताज अली ने बनाया है फ्रांस एम्बलम बनारस के लल्लापुरा निवासी जरदोजी के मास्टर मुमताज अली ने फ्रांस का एम्बलम (सिम्बल ऑफ फ्रांस) तैयार किया है. वहीं मास्टर शिल्पी कुंज बिहारी ने गुलाबी मीनाकारी आर्ट से गणेश जी की प्रतिमा बनाई है. यह खासतौर से फ्रांस के प्रेसिडेंट मैक्रों की पत्नी ब्रिगित मैक्रों को दिया जाएगा. इसके अलावा राम नगर के बच्चा लाल मौर्या ने स्टोन में अंडर कट हाथी बनाया है, साथ ही एक अंगवस्त्रम भी बनाया गया है जिसपर गीता के श्लोक लिखे हुए हैं, इसे सारनाथ के बच्चे लाल ने बनाया है. 40 साल से जरदोजी का काम कर रहे मुमताज ने बताया कि वो पिछले 40 वर्ष से आर्मी के बैज व यूरोपीय कंट्रीज से मिले ऑर्डर पर जरदोजी करते आ रहे हैं. इसमें बारीक कढ़ाई का काम होता है, जिसमें गोल्ड के बारीक धागों को पिरोया जाता है, ये कढ़ाई खासकर मखमल और साटन के कपड़ों पर की जाती है, मुगलकाल से ये आर्ट चली आ रही है.
गुलाबी मीनाकारी
गुलाबी मीनाकारी के कारीगर कुंज बिहारी ने बताया ये एक नेचुरल आर्ट है इसमें चंदन के तेल में स्वर्ण भष्म मिलाकर कलर तैयार किया जाता है, पूरा वर्क चांदी पर होता है, इसके लिए 1200 डिग्री तापमान पर अलग अलग सांचों को पकाया जाता है, इसमें हर पार्ट को अलग अलग बना कर सभी को एसेंबल किया जाता है.  400 साल पहले मुगलकाल में ये कला विकसित हुई थी गुलाबी मीनाकारी को देश की बौद्धिक सम्पदा अधिकार (Intellectual Property Right) का दर्जा 2015 में हासिल हुआ.
स्टोन कट आर्ट
स्टोन कट कलाकार बच्चा लाल मौर्या के अनुसार- स्टोन कट वर्क में स्टोन के ऊपर नहीं बल्कि अंडर कट करके तैयार किया जाता है उनका कहना है कि-अगर कोई एक्सपर्ट न हो तो तैयार किया गया सांचा टूट सकता है, इस आर्ट में स्टोन को अंदर से घिसकर खोखला करना पड़ता है,फिर आकृति के अनुसार कट लगाना पड़ता है. वहीं, सारनाथ के बच्चे लाल ने बताया कि नेचुरल कलर से बिना मशीन हाथों से कपड़े पर गीता श्लोक लिखना बेहद कठिन काम है. फ्रांस के प्रेसिडेंट को भेंट किए जाने वाले अंगवस्त्रम पर उतने ही डिस्टेंस पर शंख भी बनाया गया है. खास बात ये है कि इसमें किसी दूसरे कारीगर की मदद भी नहीं ली जा सकती है.