अयोध्‍या फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएगा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, बहुमत से फैसला

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद केस में प्रमुख पक्षकार रहे सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने मीट‍िंंग में तय किया

Published date india.com Published: November 26, 2019 1:52 PM IST
Ayodhya Ram Mandir
File Photo

लखनऊ: राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में प्रमुख मुस्लिम पक्षकार रहे उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की मंगलवार को हुई अहम बैठक में अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर विस्तृत चर्चा की गई. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की इस बैठक में बहुमत से फैसला लिया गया है कि बोर्ड को अयोध्‍या मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करना चाहिए.

बोर्ड के अध्यक्ष जुफर फारूकी ने बैठक के बाद बताया कि बैठक में बोर्ड के आठ में से सात सदस्यों ने हिस्सा लिया. उनमें से छह ने अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती न देने के प्रस्ताव का समर्थन किया. फारूकी ने बताया कि बैठक में एक सदस्य इमरान माबूद खां किन्हीं कारणों से शामिल नहीं हो सके.

फारूकी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार को दिए गए आदेश के मुताबिक अयोध्या में कहीं और मस्जिद बनाने के लिये जमीन लेने के मामले पर निर्णय लेने के लिए बोर्ड के सदस्यों ने कुछ और समय मांगा.

बोर्ड के अध्यक्ष ने बताया कि बोर्ड के सदस्यों की राय थी कि वह जमीन लेने से जुड़े तमाम शरई पहलुओं पर विचार करना चाहते हैं, लिहाजा उन्हें कुछ और समय दिया जाए.

सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड के अब्‍दुल रज्‍जाक खान ने कहा, ”हमारी मीटिंग में बहुमत से निर्णया लिया गया है कि अयोध्‍या केस में रिव्‍यू पिटीशन दाखिल नहीं करना चाहिए.”

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मीटिंग से एक दिन पहले सोमवार को बोर्ड के अध्यक्ष जुफर फारूकी ने बताया कि बोर्ड की बैठक में अन्य सामान्य कार्यों के अलावा अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनुपालन कैसे किया जाए, इस पर भी चर्चा होगी. उन्होंने बताया था कि बैठक में इस बात पर विचार विमर्श होगा कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए या नहीं और मस्जिद के बदले जमीन देने के अदालत के आदेश पर क्या कदम उठाया जाए.

हालांकि खुद फारूकी पुनर्विचार याचिका दाखिल करने से यह कहते हुए पहले ही मना कर चुके हैं कि वह बोर्ड के फैसले खुद ही लेने को स्वतंत्र हैं. मगर यदि बोर्ड के किसी सदस्य को इस पर ऐतराज है तो वह 26 नवंबर की बैठक में अपनी बात रख सकता है.

फारूकी ने स्पष्ट किया कि बैठक के बाद कोई प्रेस कांफ्रेंस नहीं होगी. मीडिया को विज्ञप्ति के जरिए जानकारी दी जाएगी.

बता दें कि अयोध्‍या मामले में गत 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिए गए निर्णय में विवादित स्‍थल पर राम मंदिर का निर्माण कराने और मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्‍या में किसी प्रमुख स्‍थान पर जमीन देने का आदेश दिया था.

सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड के अध्‍यक्ष फारूकी उसी दिन से कह रहे हैं कि बोर्ड न्यायालय के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करेगा.

अयोध्‍या मामले में मुस्लिम पक्ष का संरक्षण कर रहे ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने गत 17 नवंबर को अपनी वर्किंग कमेटी की आपात बैठक में न्यायालय के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने और मस्जिद के बदले कहीं भी जमीन न लेने का फैसला करते हुए उम्‍मीद जाहिर की थी कि सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड भी उसके फैसले का सम्‍मान करेगा मगर, फारूकी ने तब भी कहा था कि वह याचिका न दाखिल करने के अपने फैसले पर कायम हैं.

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