Supertech Emerald Court Case: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नोएडा में निर्माणाधीन सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट सोसायटी के  40 मंजिल के दो टावरों को ध्वस्त करने के आदेश दिए. साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि कंपनी को अपनी लागत से ही दो महीने की अवधि के भीतर इन्हें तोड़ना होगा और सभी फ्लैट मालिकों को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ पूरे पैसे वापस करना होगा. 10 साल तक चले इस केस में कोर्ट का ये फैसला नोएडा अथॉरिटी के खिलाफ सबसे बड़ा फैसला था. सुप्रीम कोर्ट ने इस निर्माण को अवैध करार दिया और साथ ही यह कड़ी टिप्पणी भी की थी कि नोएडा अथॉरिटी की सुपरटेक के साथ मिलीभगत थी.Also Read - डॉ. कफील खान को राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दूसरे निलंबन पर लगाई रोक, योगी सरकार ने की थी कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े आदेश और टिप्पणी के बाद नोएडा अथॉरिटी के तत्कालीन अधिकारियों की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है. साथ ही, बिल्डर्स के लिए किस तरह से अथॉरिटी में नियम-कानून ताक पर रखे गए और फ्लैटों के निर्माण के आदेश दिए गए. यह भी अब सबके सामने आ गया है. Also Read - अप्रयुक्त ITC के लिए रिफंड इनपुट सेवाओं पर दावा नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

इसके बाद यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कड़ा फैसला लेते हुए नोएडा में सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट में ट्विन टावरों के निर्माण में कथित अनियमितता के आरोपित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं. Also Read - Pegasus Case: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लगाई फटकार-अबतक एफिडेविट दाखिल क्यों नहीं किया, मिला ये जवाब

बता दें कि सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट प्रॉजेक्ट 2004 के बाद नोएडा के सेक्टर-93 ए में शुरू हुआ था. इसमें भूतल और 9 मंजिल वाले 14 टावर थे. इसके बाद अथॉरिटी में संशोधन शुरू हुआ तो टावरों की ऊंचाई और संख्या बढ़ा दी गई और 14 टावर बढ़कर 17 हो गए.

आखिर में टावर नंबर नंबर-16 और 17 को 2012 में भूतल और 40 मंजिल बढ़ाने की मंजूरी दे दी गई थी. इनके नाम ऐपेक्स और सियान रखे गए थे. इनके निर्माण के खिलाफ आरडब्ल्यूए ने कानूनी लड़ाई लड़ी और इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 11 अप्रैल 2014 को नोएडा स्थित एमरॉल्ड कोर्ट के टि्वन टावर को तोड़ने का आदेश पारित किया था और नोएडा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था.