नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को गौतमबुद्ध नगर जिले के अस्पतालों में जगह नही मिलने की वजह से एक गर्भवती महिला की मृत्यु होने की घटना को गंभीरता से लिया और प्रशासन से कहा कि इससे इंकार करने का औचित्य नहीं है. शीर्ष अदालत ने जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि उसके यहां पृथक-वास के बारे में राष्ट्रीय दिशानिर्देशों से अलग दिशानिर्देश नहीं हों. न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने इस मामले की वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. Also Read - Delhi- NCR समेत यूपी और हरियाणा के इन शहरों में बारिश का अलर्ट, छाए रहेंगे बादल

जिले के अस्पताल में बिस्तर के लिये भटकती एक गर्भवती महिला की मृत्यु हो जाने संबंधी खबर का जिक्र करते हुये पीठ ने कहा, ‘इससे इंकार करने के मूड में मत रहिये कि वहां कोई समस्या नहीं है.’ न्यायालय ने सालिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह इस मामले में गौर करें. न्यायालय ने 12 जून को कोविड-19 महामारी के बीच नोएडा प्रशासन द्वारा संस्थागत पृथक-वास पर जारी दिशा-निर्देशों के बारे में उत्तर प्रदेश सरकार को जानकारी देने का निर्देश दिया था. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा था, ‘राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के विपरीत कोई दिशा निर्देश नहीं हो सकता है.’ Also Read - Delhi-Noida-Ghaziabad Border Latest News: सील हुआ दिल्ली-नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर, सिर्फ इन लोगों को मिल सकेगा ई-पास

न्यायालय का मानना था कि राष्ट्रीय या राज्य के दिशानिर्देशों से अलग कोई भी निर्देश अव्यवस्था का कारण बन सकता है. शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आवागमन के पर प्रतिबंध का मुद्दा उठाने वाली एक याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इस संबंध में ‘पूरी जानकारी’ देने के लिए कहा था कि क्या नोएडा में बिना लक्षणों वाले लोगों को संस्थागत पृथक-वास में या घर पर पृथक रखा गया है या नहीं. पीठ ने अपने आदेश में कहा था, ‘यह भी हमारे ध्यान में लाया गया है कि जिला मजिस्ट्रेट, नोएडा द्वारा जारी किए गए कुछ दिशा निर्देश राष्ट्रीय दिशानिर्देशों और उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुरूप नहीं हैं.’ Also Read - विकास दुबे के एनकाउंटर से चंद घंटे पहले सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई थी याचिका, हत्या की जताई गई थी आशंका, जानें सच

न्यायालय ने केन्द्र को यह सुनिश्चित करने के लिये कहा था कि राज्य अपने यहां राष्ट्रीय दिशा निर्देशों का उल्लंघन नहीं करें. न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि अधिकारी दिशा निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं. केंद्र ने पीठ को बताया था कि गृह सचिव ने एनसीआर में आवाजाही पर प्रतिबंध के मुद्दे से निपटने के लिए नौ जून को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मुख्य सचिवों के साथ संयुक्त बैठक की थी. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि दिल्ली और हरियाणा की सीमाओं पर कोई बाधा नहीं है लेकिन उत्तर प्रदेश ने कुछ मुद्दों को उठाया है.