लखनऊ: यूपी के पूर्व मुख्‍यमंत्री को अब रहने के लिए सरकारी बंगला नहीं मिलेगा. यह फैसला सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक एनजीओ ‘लोक प्रहरी’ की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया. बता दें कि सपा सरकार में पूर्व मुख्‍यमंत्रियों के रहने के लिए सरकारी आवास दिए जाने के कानून में संशोधन किया गया था. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए यूपी की सपा सरकार के फैसले को रद्द दिया. Also Read - UP Legislative Council की 11 सीटों पर मतगणना जारी, जल्‍द आएंगे परिणाम

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बता दें कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले भी एक बार सुप्रीमकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन आवास दिए जाने का नियम रद्द कर दिया था, लेकिन तब यूपी की तत्कालीन अखिलेश सरकार नया कानून ले आई थी, लेकिन अब एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास पाने की सुविधा से वंचित कर दिया है. न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कानून में संशोधन संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात है, क्योंकि यह संविधान के तहत प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है. पीठ ने कहा कि यह संशोधन ‘मनमाना, भेदभाव करने वाला’और समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करने वाला है.

सार्वजनिक पद छोड़ने के बाद आम-खास में नहीं रहता कोई अंतर

न्यायालय ने कहा कि एक बार कोई व्यक्ति सार्वजनिक पद छोड़ देता है तो उसमें और आम नागरिक में कोई अंतर नहीं रह जाता. सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास में बने रहने की अनुमति देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कानून में किये गए संशोधन को चुनौती देने वाली गैर सरकारी संगठन की याचिका पर अपना फैसला 19 अप्रैल के सुरक्षित रख लिया था. न्यायालय ने पहले कहा था कि एनजीओ ‘लोक प्रहरी’ ने जिस प्रावधान को चुनौती दी है, अगर उसे अवैध करार दिया जाता है तो अन्य राज्यों में मौजूद समान कानून भी चुनौती की जद में आ जाएंगे.

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‘लोक प्रहरी’ एनजीओ ने दी थी अखिलेश सरकार के फैसले को चुनौती

एनजीओ ‘लोक प्रहरी’ ने पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार द्वारा ‘उत्तर प्रदेश मंत्री (वेतन, भत्ते और अन्य प्रावधान) कानून, 1981 में किये गये संशोधन को चुनौती दी थी. याचिका में न्यास, पत्रकारों, राजनीतिक दलों, विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, न्यायिक अधिकारियों तथा सरकारी अफसरों को आवास आवंटित करने वाले कानून को भी चुनौती दी गयी है.

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खाली करना पड़ेगा सरकार बंगला

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव, मायावती, राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह को उत्‍तर प्रदेश में मिला सरकारी बंगला खाली करना होगा. बता दें कि फिलहाल यहां छह पूर्व मुख्यमंत्रियों के पास लखनऊ, हजरतगंज के पॉश इलाके में कई-कई एकड़ में बड़े-बड़े सरकारी बंगले हैं.