सीतापुर: जिले के खैराबाद कस्बे के कई गांवों में आदमखोर कुत्तों ने मासूम बच्चों को अपना निशाना बनाया. गांव वालों में इस कदर दहशत है कि वह अपने बच्चों को अकेले कहीं नहीं जाने देते.
स्थानीय लोगों का कहना है कि योगी सरकार की सख्ती के बाद अवैध बूचड़खाने बंद हो गए,जिससे जानवरों के मांस खाने के आदी कुत्ते इंसानों का मांस खाने लगे. इन खतरनाक कुत्तों के लिए बच्चे सबसे आसान शिकार होने लगे.Also Read - Weird News: पालतू कुत्तों को रोटी देने से किया मना, तो भाई ने बहन को मार दी गोली...

आदमखोर कुत्तों से निपटने में प्रशासन नाकाम Also Read - कम्प्यूटर बाबा की गिरफ्तारी पर दिग्विजय सिंह की प्रतिक्रिया- 'यह राज्य सरकार की राजनीतिक प्रतिशोध की चरम सीमा'

इन आदमखोर कुत्तों से निपटने में शासन और प्रशासन दोनों ही नाकाम रहे हैं क्योंकि इन हिंसक हो चुके कुत्तों को पकड़ने के लिए न सिर्फ सीतापुर जिले में बल्कि आस-पास के जिलों में भी डॉग कैचर स्क्वाड नहीं है. सिर्फ लखनऊ जिले में नगर निगम लखनऊ के पास डॉग कैचर स्क्वाड है, लेकिन वह भी क्रियाशील नहीं है क्योंकि एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की गाइडलाइंस के अनुसार स्ट्रीट डॉग्स को मारा नहीं जा सकता सिर्फ sterile किया जा सकता है, साथ ही इन्हें क्षेत्र से बाहर भी नहीं छोड़ा जा सकता अर्थात उनके बंध्याकरण के पश्चात् उन्हें उनके एरिया में ही रखा जायेगा. स्टेराइल करने से सिर्फ उनकी संख्या पर ही नियंत्रण किया जा सकता है लेकिन उनकी हिंसक प्रवृत्ति और मनुष्य तथा बच्चों पर हमला करने को रोका नहीं जा सकता. Also Read - Flood In Bihar: बिहार में बाढ़ की आशंका को लेकर अलर्ट, बचाव के लिए होगा ड्रोन का उपयोग

अब तक आधा दर्जन बच्चों की मौत, 2 दर्जन से ज्यादा जख्मी

स्थिति कितनी भयावह है इसका अंदाजा एक के बाद एक लगातार होने वाली इन घटनाओं से लगाया जा सकता है.
दृष्टांत- 1, नवंबर 17 थाना खैराबाद मुलहि सरैया निवासी महेश की 11 वर्ष की बेटी हिमांशी पर आदमखोर कुत्तों का हमला. नतीजा मौत.
दृष्टांत 2, -जनवरी 2018 खैराबाद थाना के गोविंदा सराय निवासी कैलाश की 11 वर्षीय बेटी सोनम पर कुत्तों का जानलेवा हमला. मौत.
दृष्टांत 3, -21 जनवरी 2018 खैराबाद थाना के गुरपलिया निवासी रहीम के 12 वर्षीय पुत्र मोबीन पर कुत्तों ने घेरकर किया हमला. मौत.
दृष्टांत 4, – 11 फरवरी 2018 खैराबाद थाना क्षेत्र के खुरेहटा निवासी सिंह नाथ की 7 वर्षीय पुत्री शगुन पर हिंसक कुत्तों का हमला, गिरा कर मार डाला और खा गए.
दृष्टांत 5, – 8 मार्च 2018 को खैराबाद थाना के बद्री खेड़ा गांव के माशूक अली के 10 वर्षीय पुत्र अरबाज को खेत में कुत्तों ने घेरा और मार डाला.
दृष्टांत 6, – 16 मार्च 2018 खैराबाद थाना क्षेत्र के नेवादा निवासी रशीद की 13 वर्षीय बेटी सानिया पर घर के बाहर कुत्तों का हमला. मौत .
5 माह में छह मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हिला कर रख देने के लिए काफी है, लेकिन इन मासूम बच्चों की मौत के बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई विशेष प्रयास होते नहीं दिखे. सिर्फ इतना ही नहीं इन 6 बच्चों की मौत के अलावा लगभग दो दर्जन से ज्यादा ऐसे बच्चे हैं जो किसी तरह से इन आवारा और आदमखोर कुत्तों से अपने को बचाने में सफल हो सके हैं.

कुत्तों से निपटने के लिए स्वयं सहायता समूह का गठन

इन खबरों के मीडिया में आने के बाद ही खैराबाद पुलिस द्वारा 10 -10 लोगों का ग्रुप बनाकर लाठी-डंडों से लैस होकर कुत्तों पर नजर रखने को लगाया गया, मदद के लिए सिपाही भी लगाए गए. यह 16 मार्च को तब किया गया था जब आदमखोर कुत्तों ने 4 मासूमों पर हमला बोल कर एक बालिका को मार डाला।
इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से ADM विनय कुमार पाठक ने डीएफओ, सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम सदर, सीओ सिटी और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी की एक टीम गठित कर दी.
10 किलोमीटर के दायरे में रहकर आवारा हिंसक हो चुके कुत्तों से लोगों को सुरक्षित बचाने में पुलिस का बनाया ग्रुप और जिला प्रशासन द्वारा गठित टीम लगी रही, इसके बाद भी आदमखोर कुत्तों ने नारायनपुर निवासी माहित(9 वर्षीय) व शिवांशी ( 4 वर्षीय) पर हमला कर दिया. ग्रामीणों ने किसी तरह मुकाबला कर बच्चों की जान बचाई.

खुले में शौच भी बताया जा रहा है कारण

इलाके की लाखों की आबादी भयाक्रांत और दहशत में है और अपनी तथा अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर आक्रोशित भी है. यह समस्या इसलिए भी और गंभीर है क्योंकि गांव की अधिकांश आबादी खुले में शौच जाती है,और कुत्तों के ज्यादातर हमले शौच के लिए गए बच्चों पर हुए, घरों में शौचालय न होने के चलते यह खतरा हर समय विद्यमान है. इस से गांवों को खुले में शौच से मुक्त यानी ओडीएफ कराने को लेकर भी कई गंभीर सवाल उठते हैं.

जरुरत के मुताबिक नहीं बन रहे शौचालय

सिर्फ एक खुरेहटा ग्राम सभा के आंकड़े देख कर ही गांव में शौचालय निर्माण की स्थिति समझी जा सकती है, जहां के ग्राम प्रधान मंशादीन के अनुसार यहां 400 शौचालय बनाया जाना प्रस्तावित है लेकिन सिर्फ 56 शौचालय ही बनाए जा रहे हैं. रहीमाबाद के गुरपलिया गांव की ग्राम प्रधान कमरुन्निशा के पति जिला पंचायत सदस्य इंतजार अली के अनुसार उनके गांव में पिछले 1 साल से कोई शौचालय नहीं बना है, जिस पर प्रशासन की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है.
जिले की जनता कुत्तों के आतंक के कारण भयाक्रांत है. समस्या बहुत गंभीर है और उसको तत्काल प्रभाव से हल किए जाने की आवश्यकता है.