लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लिए उस समय अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब एक मामले में पेश हुए कथित वकील को उसके ही नाम के एक दूसरे वकील का रोल नंबर उपयोग करते हुए पाया गया. यह मामला अदालत के संज्ञान में उस समय आया जब असली अधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया कि इस अदालत के साथ धोखाधड़ी कर उसका रोल नंबर उपयोग किया जा रहा है. Also Read - 14 राज्यों में अब तक तबलीगी जमात के 647 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए: Health Ministry

इस घटना को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने रजिस्ट्रार जनरल को इस मामले की जांच करने और 14 सितंबर तक एक सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करने को कहा. मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी. इस बीच, अदालत ने अधिवक्ता जितेंद्र कुमार सिंह के नाम पर वकालत कर रहे व्यक्ति को किसी भी अदालत के समक्ष पेश होने या अधिवक्ता का यूनीफार्म पहनने से रोक दिया. राम गोपाल नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर आपराधिक याचिका पर बुधवार को जब सुनवाई शुरू की गई तो राम गोपाल का वकील इस मामले में बहस के लिए खड़ा हुआ. तभी अदालत में मौजूद एक अन्य अधिवक्ता ने आपत्ति की कि जिस जितेंद्र कुमार सिंह का रोल नंबर उपयोग किया जा रहा है, वह जितेंद्र कुमार वे स्वयं हैं. Also Read - कोरोना महासंकट के बीच हुए इन हमलों ने बढ़ाई देश की चिंता, तैनात करना पड़ रहे पुलिस जवान

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कोर्ट में 15 दिन में रिपोर्ट देने को कहा
मामला दायर करने वाले वकील ने इस पर कहा कि उसका नाम भी जितेंद्र कुमार सिंह है और मामला दायर करते समय त्रुटिवश गलत रोल नंबर का उल्लेख हो गया होगा. बाद में उसने स्वीकार किया कि अधिवक्ता रोल नंबर के लिए उसका आवेदन खारिज कर दिया गया था. न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा ने रजिस्ट्रार जनरल को इस मामले की जांच कर 15 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया.

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रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष पेश
अधिवक्ता जितेंद्र कुमार सिंह के तौर पर खुद को पेश करने वाले व्यक्ति को पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष पेश किया गया जिन्होंने प्रारंभिक पूछताछ कर उसे सुनवाई की अगली तारीख पर हाजिर होने की हिदायत देते हुए रिहा कर दिया. उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय से रोल नंबर प्राप्त करने वाले अधिवक्ता ही मामला दायर कर सकते हैं और जिरह के लिए अदालत में पेश हो सकते हैं. (इनपुट एजेंसी)