नैनीताल (उत्तराखंड): उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा कि बदरीनाथ मंदिर को राष्ट्रीय विरासत स्थल घोषित किया जा सकता है या नहीं. कानून की छात्रा चेतना भार्गव द्वारा दाखिल एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने जल निगम के वकील को निर्देश दिया कि क्षेत्र का निरीक्षण करें और अगली सुनवाई पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करें. Also Read - CM योगी ने दूसरे राज्‍यों से की अपील, यूपी के लोगों के खाने-रहने की व्‍यवस्‍था करें, हम खर्च देंगे

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न्यायमूर्ति वी.के.बिष्ट व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी ने केंद्र सरकार से मामले की अगली सुनवाई पर 27 अगस्त तक हलफनामा दाखिल करने को कहा. इसमें महाधिवक्ता से कहा गया है कि सचिव (शहरी विकास) के साथ क्षेत्र को विशेष तौर से विकसित करने की संभावना पर चर्चा करना चाहिए. जनहित याचिका (पीआईएल) में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्र (एसटीपी) का निर्माण अलकनंदा व ऋषि गंगा के मुहाने पर किया गया है, जिससे गंदा सीवेज का पानी नदियों में जा रहा है. याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि एसटीपी को कही अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए, क्योंकि नदी के जल का इस्तेमाल मंदिरों द्वारा किया जाता है. Also Read - जल जीवन मिशन: सरकार ने कहा- ग्रामीण परिवार को 55 लीटर प्रति व्यक्ति मिलेगा पेयजल

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बदरीनाथ मंदिर के बारे में जाने
बदरीनाथ मंदिर, जिसे बदरीनारायण मंदिर भी कहते हैं, अलकनंदा नदी के किनारे उत्तराखंड राज्य में स्थित है. यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप बदरीनाथ को समर्पित है. यह हिन्दुओं के चार धाम में से एक धाम भी है. ऋषिकेश से यह 294 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर दिशा में स्थित है. ये पंच-बदरी में से एक बद्री हैं. उत्तराखंड में पंच बदरी, पंच केदार और पंच प्रयाग पौराणिक दृष्टि से और हिन्दू धर्म की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं. भगवान बदरीनाथ के दर्शन के लिए हर साल कई लाख लोग पहुंचते हैं. कहा जाता है की यहां भगवान के दर्शन के बाद मनुष्य को मोक्ष मिलता है.