लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कल यानि 18 दिसम्बर से शुरू हो रहे विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं. विपक्षी पार्टियों ने कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरने की योजना बनाई है. इसकी तैयारी को लेकर सपा, बसपा अपने-अपने विधायकों को बुलाकर रणनीति तैयार कर रही है. बुलंदशहर में हुई हिंसा के मुद्दे को विपक्षी पार्टियां प्रमुखता से उठाने के मूड में हैं. 5  राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों से भी विपक्ष के बुलंद हैं. हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने सत्र शुरू होने से पहले ही इसे चर्चा का विषय न बनाए जाने का भरोसा जताया है.

कुंभ 2019: विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने लिया जायजा, वीके सिंह ने कहा- पूरी दुनिया के लोग देखेंगे भव्यता

प्रदेश में कानून व्यवस्था है ही नहीं
हालांकि शीतकालीन सत्र इस बार ज्यादा बड़ा नहीं है और सरकार अनुपूरक बजट पास कराने के प्रयास में लगी है. विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित के मुताबिक, “सत्र छोटा है लेकिन एक-एक मिनट का उपयोग होगा. हर मुद्दे पर विपक्षी दलों को चर्चा का समय दिया जाता है और वह पूरा सहयोग करते हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि इस सत्र में सभी माननीय दूसरे विधानसभा चुनाव को लेकर बहस नहीं करेंगे ऐसी उन्हें उम्मीद है. उन्होंने आगे कहा कि विधानसभा के सभी सदस्य जागरूक हैं, वे समय का सदुपयोग करना चाहते हैं और जानते भी हैं.”

वहीं विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन ने कहा, “प्रदेश में कानून व्यवस्था है ही नहीं. बुलंदशहर की घटना इसका सीधा उदाहरण है. सपा सरकार में हुई भर्ती अभी तक अटकी है. किसानों की बहुत सारी समस्याओं का सरकार कोई भी निदान नहीं ढूंढ़ पा रही है. इन्हीं सब मुद्दों को उठाया जाएगा. बसपा और कांग्रेस भी सरकार को कानून व्यवस्था और गन्ना किसानों की समस्याओं को उठाने की बात कह रहीं है.”(इनपुट एजेंसी)

कांग्रेस देश व सेना को कमजोर करने वाली ताकतों के साथ खड़ी है: पीएम मोदी