बरेली: जनपद बरेली में तीन तलाक और हलाला से सम्बंधित एक चौंकाने वाला कथित मामला सामने आया है. एक शख्स पर उसकी बीवी ने पहले तलाक देकर घर से निकालने और फिर से साथ रखने केलिए अपने ही ससुर के साथ हलाला कराने और दोबारा तलाक देने के बाद अब देवर से हलाला कराने की जिद करने का आरोप लगाया है. Also Read - CTET Syllabus & Questions 2020 Maths: सीटीईटी एग्जाम करना चाहते हैं क्वालीफाई, तो उससे पहले करें ये काम 

पहले तलाक के बाद ससुर से हलाला
बरेली शहर के बानखाना इलाके की निवासी शबीना ने रविवार को आला हजरत हेल्पिंग सोसायटी की अध्यक्ष निदा खान के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि, उसकी शादी गढ़ी-चैकी के रहने वाले वसीम से वर्ष 2009 में हुई थी. उसका आरोप है कि दो साल बाद शौहर ने उसे तलाक देकर घर से निकाल दिया. बाद में उसी साल वसीम ने अपने पिता के साथ उसका हलाला कराया. उसके बाद वह फिर वसीम के साथ रहने लगी, मगर लड़ाई-झगड़े खत्म नहीं हुए. Also Read - Corona Virus: मध्य प्रदेश के इस इलाके पर टूटा कोरोना का कहर, अनिश्चितकाल के लिए लगा लॉकडाउन

दूसरे तलाक के बाद देवर से हलाला की जिद
शबीना का आरोप है कि वर्ष 2017 में उसके शौहर ने उसे फिर तलाक दे दिया. अब वह अपने भाई के साथ हलाला करने की शर्त रख रहा है. शबीना ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया है. अपने ही ससुर के साथ हलाला करने के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में शबीना ने कहा कि उनके पास इसके सिवा और कोई रास्ता नहीं था. वह तो बस अपना उजड़ा घर बसाना चाहती थी. Also Read - MS Dhoni का जन्मदिन मनाने भाई-भाभी के साथ रांची पहुंचे हार्दिक पांड्या

तीन तलाक और हलाला पर सख्त क़ानून की मांग
सबीना का कहना है कि, वह तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह पर सख्त कानून चाहती हैं ताकि औरतें इस जुल्म से बच सकें. वहीं इस मामले पर मुफ्ती खुर्शीद आलम का कहना है कि सबसे पहले तो यह देखना होगा कि ससुर के साथ हलाला कैसे हुआ? अगर ऐसा हुआ तो यह बड़ा गुनाह है. उन्होंने कहा और दूसरी बात ये है कि, ससुर से हलाला होने पर बहू अपने पहले शौहर पर हराम हो गई. ऐसी स्थिति में वह दोबारा अपने पहले शौहर के साथ नहीं रह सकती. आला हजरत हेल्पिंग सोसायटी की अध्यक्ष निदा खान का कहना है कि तीन तलाक पर अभी कानून संसद में पारित नहीं हुआ है. सरकार को चाहिए कि इसमें हलाला और बहु-विवाह को भी शामिल करे. इससे लाखों औरतों की जिंदगी नर्क बनने से बच जाएगी.

शरई अदालतों में औरतों को भी काजी बनाने की मांग
आला हजरत हेल्पिंग सोसायटी की अध्यक्ष निदा खान ने इस मौके पर कहा कि औरतों को तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह का दंश देने वाले मर्द शरीयत के नाम का खुलकर गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सही फैसलों के लिए जरूरी है कि शरई अदालतों (दारुल क़ज़ा) में औरतों को भी काजी बनाने की व्यवस्था की जाए. उन्होंने कहा कि वह नहीं मानती कि इस्लामी कानून ऐसा है जिसके तहत एकतरफा फैसले दिए जाते हों. इस्लाम में औरतों के अधिकारों के लिये जो व्यवस्थाएं हैं, उन्हें अक्सर छुपाया जाता है ताकि उन्हें इंसाफ ना मिले. निदा ने कहा कि शौहर के जुल्म से बेघर हुईं औरतें अब कानून का सहारा चाहती हैं. ऐसा सख्त कानून, जो उनका घर उजड़ने से बचाए साथ ही उन्हें पूरी सुरक्षा भी दे सके. (इनपुट एजेंसी)