लखनऊ : बलरामपुर के एक बिजनेस मैन ने जिस अनाथ लड़की से लव मैरिज की थी उसे निचली अदालत ने बंगलादेश निवासी पाया और बिना पासपोर्ट व वीजा के अनधिकृत रूप से भारत में रहने पर दो साल की सजा सुनाई और जेल भेज दिया. हाईकोर्ट से रिहाई के आदेश के बावजूद कानूनी अड़चनो के चलते उसे याची को नहीं सौंपा जा सकता है. अब अपनी पत्नी को पाने के लिए सुरजन ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका दायर की है जिस पर आगामी 6 जुलाई को सुनवाई होगी. निचली अदालत के फैसले के खिलाफ बिजनेस मैन सुरजन अधिकारी ने हाईकोर्ट में अपील की थी.

सुरजन अधिकारी के वकील दिलीप पाठक के मुताबिक पीड़ित याची की पत्नी प्रिया कोलकाता की निवासी हैं. जब वह छोटी थीं तभी लावारिस हालत में कोलकाता निवासी दीप्ति नाम की एक महिला को मिली थी. दीप्ति के परिचित सुरजन अक्सर कोलकाता जाते थे. इसी दौरान वे अनाथ प्रिया के संपर्क में आए, और दोनों ने जुलाई 2016 में लव मैरिज कर ली. बलरामपुर में कुछ लोगों ने प्रिया को बांग्लादेशी बताते हुए पुलिस से शिकायत की जिसके बाद जांच के आधार पर निचली अदालत से प्रिया को बिना पासपोर्ट व वीजा के अनधिकृत रूप से भारत में रहने पर दो साल की सजा सुनाई. इस फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए 29 मई को हाईकोर्ट ने प्रिया की सजा के बचे हुए पांच महीने माफ करते हुए उसे रिहा करने के आदेश दिए.

प्रदेश सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि प्रिया को विदेशी नागरिक अधिनियम में दोषी करार दिया जा चुका है. हाईकोर्ट के आदेश पर रिहा होने के बाद भी उसका दोष खत्म नहीं हो जाता, और  न ही भारतीय नागरिक से उनकी शादी उन्हें दोषमुक्त करती है, वह अनधिकृत रूप से भारत में रह रही थी. ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश पर प्रिया को रिहा करने के बाद उसे बांग्लादेश हाईकमीशन को या उनके द्वारा अधिकृत किए गए किसी व्यक्ति को ही सौंपा जा सकता है. जिसके मद्देनजर बलरामपुर जेल के वरिष्ठ अधीक्षक ने बांग्लादेश हाईकमीशन नई दिल्ली को पत्र लिखा है. अपनी पत्नी को पाने के लिए भटक रहे सुरजन ने अब इसके खिलाफ हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है, जिस पर अदालत ने प्रदेश सरकार व अन्य संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को रखी गई है.