नई दिल्‍ली: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्‍यक्ष रामशंकर कठेरिया ने कहा कि आयोग जल्‍द ही अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से कहेगा कि वो अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों की तरह ही आरक्षण नीति को लागू करे या फिर अगस्त महीने तक अपना दस्तावेज पेश कर अल्पसंख्यक दर्जा साबित करे. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक आयोग के चेयरमैन रामशंकर कठेरिया ने कहा कि ये पाकिस्तान नहीं है, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को नियमों का पालन करना होगा. Also Read - Viral Video: पाकिस्तान में अनोखी शादी, दूल्हे को गिफ्ट में दी AK 47, लोग बोले- गरीब देश के अमीर...

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कठेरिया ने कहा कि मानव संसाधन मंत्रालय, यूजीसी और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने इस बात की पुष्टि की है कि एएमयू के पास अल्पसंख्यक दर्जा नहीं है. बता दें कि केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा था कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है और मामला लंबित है. उन्‍होंने बताया कि तीन जुलाई को एएमयू अधिकारियों के साथ उनकी बैठक हुई थी. बैठक के दौरान एएमयू के रजिस्ट्रार और वाइस चांसलर एक भी ऐसा दस्तावेज नहीं दिखा सके, ऐसे में हमने उन्हें दस्तावेज जमा करने के लिए एक महीने का समय दिया है. हालांकि इससे साफ हो गया है कि उनके पास (एएमयू) कोई दस्‍तावेज नहीं हैं. Also Read - मुंबई हमले को भूल नहीं सकता भारत, अब नई नीति के साथ देश आतंकवाद से लड़ रहा है: PM मोदी

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अगस्‍त में होगी पैनल की बैठक

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्‍यक्ष रामशंकर कठेरिया ने कहा कि अगस्त के अंत तक, पूर्ण समिति (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति पैनल) की बैठक होगी, जिसमें सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों द्वारा आवश्यक कोटा प्रदान करने के लिए आदेश जारी किया जाएगा. विश्वविद्यालय में लगभग 30,000 छात्र हैं और इन सीटों में से 15 प्रतिशत अनुसूचित जाति के छात्रों और 7.5 प्रतिशत एसटी के पास जाना चाहिए था. यदि एएमयू दस्तावेजों को उपलब्ध कराने में असफल रहता है, तो उसे 4,500 दलित छात्रों और 2,250 जनजातीय छात्रों को प्रवेश देना होगा.

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एएमयू के इनकार से पांच लाख एससी/एसटी छात्र सीटों से हुए थे वंचित

कैथरिया ने दावा किया कि संविधान में निर्धारित कोटा प्रदान करने से एएमयू के इनकार करने से 1951 में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ओबीसी सेक्शन के 5 लाख छात्रों को सीटों से वंचित कर दिया था. इस मुद्दे पर राजनीति को लेकर कठेरिया ने कहा कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती इस मुद्दे पर चुप हैं. अगर उन्‍हें लगता है कि बीजेपी दलित मुद्दों पर गंदी राजनीति कर रही है, तो वे आंदोलन करें, हम उनके पीछे रैली में शामिल रहेंगे.