लखनऊ: उत्‍तर प्रदेश की इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के लिए बुरी खबर है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की जांच में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरएल हैंग्लू फंसते नजर आ रहे हैं. नवंबर 2017 में आई पांच सदस्यीय जांच कमेटी ने यूजीसी को अपनी जांच रिपोर्ट एक सप्ताह पूर्व सौंप दी है. इस रिपोर्ट के आधार पर यूजीसी ने प्रो. हांगलू से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है.

बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पांच सदस्यीय कमेटी को पिछले साल नवंबर में परफॉर्मेंस ऑडिट के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भेजा था. यूजीसी को सौंपी रिपोर्ट में कमेटी ने कई सवाल उठाए हैं. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विश्‍वविदयालय के कुलपति निश्चित रूप से एक मुखर व्यक्ति हैं, लेकिन उनमें नेतृत्व क्षमता का अभाव है. उन्होंने खुद को एक खराब मैनेजर साबित किया है. देखा गया है कि वह रोजमर्रा होने वाली समस्याओं में ही उलझे रह गए. कमेटी ने जो देखा, उसके अनुसार ‘विश्वविद्यालय को कुलपति और उनकी एक छोटी सी मंडली चला रही है. छात्रों और आम अध्यापकों के साथ उनका कोई संपर्क नहीं है. बाकी विश्वविद्यालयों में भी प्रबंधन को कम महत्व दिया जाता है, लेकिन इलाहाबाद विश्‍वविदयालय में तो प्रबंधन नाम की कोई चीज ही नहीं रह गई है.

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कमेटी ने कुलपतियों के कार्यकाल पर भी सवाल
कमेटी ने इलाहाबाद विश्‍वविदयालय को वर्ष 2005 में केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद तीन स्थायी और दो कार्यवाहक कुलपतियों के कार्यकाल पर गंभीर सवाल उठाए हैं. तीन स्थायी कुलपतियों में प्रो. हांगलू के साथ प्रो. हर्षे और प्रो. एके सिंह के नाम शामिल हैं. रिपोर्ट में प्रो. हर्षे और प्रो. एके सिंह का नाम भी लिया गया गया है और कहा गया है कि जिस क्षमता के साथ केंद्रीय विश्वविद्यालय को चलाया जाना चाहिए था, उस हिसाब से अन्य दो स्थायी कुलपति भी सफल नहीं हो सके.

समिति ने नवंबर में की थी जांच
बता दें कि समिति की स्थापना 10 अक्टूबर, 2017 को यूजीसी द्वारा विश्वविद्यालय के अकादमिक, अनुसंधान, वित्तीय और आधारभूत लेखा परीक्षा आयोजित करने के लिए की गई थी और बाद में नवंबर 2017 में इसका पुनर्गठन किया गया था. यूजीसी की जांच कमेटी ने पिछले साल 13 से 15 नवंबर तक इविवि में परफॉर्मेंस ऑडिट किया था. कमेटी के संयोजक प्रो. केपी पांडियन थे. उनके अलावा अन्य सदस्यों में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज, बंगलूरू के प्रो. गौतम देसी राजू, मणिपुर विश्वविद्यालय के प्रो. साईबाम इतोम्बी, कोलकाता विश्वविद्यालय के प्रो. पिनाक चक्रवर्ती, आईआईएम संभलपुर, उड़ीसा के निदेशक टीम प्रो. महादेव जायसवाल एवं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली की प्रो. अमिता सिंह शामिल थीं. 13 और 15 नवंबर, 2017 के बीच इलाहाबाद विवि परिसर में तीन दिवसीय यात्रा के बाद पैनल द्वारा प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में, समिति ने संक्षेप में बताया है कि विश्वविद्यालय की स्थिति सभी अकादमिक, वित्तीय और प्रशासनिक मामलों में स्थिति अपमानजनक है.

समिति ने विश्‍वविदयालय को लेकर जताई चिंता
समिति की रिपोर्ट में कहा है कि यदि वर्तमान स्थिति जारी है, तो यह विश्वविद्यालय लिए घातक सिद्ध हो सकता है. ऐसे में रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्‍वविद्यालय की बदहाल स्थि‍ति को देखते हुए एमएचआरडी को उचित कार्रवाई पर विचार करने की जरूरत है. शिक्षण-शिक्षा और मूल्यांकन पर टिप्पणी करते हुए, कमेटी ने पाया है कि विश्वविद्यालय अपने संकाय की ताकत पर बनाया गया है. विश्वविद्यालय में 820 की स्वीकृत के बावजूद 317 शिक्षक हैं. ऐसे में छात्र: शिक्षक अनुपात 79: 1 है, जो बेहतर शिक्षा के लिए श्रेष्‍ठ नहीं है. पिछले 20 वर्षों या उससे अधिक के लिए कई विभागों की कोई नई नियुक्ति नहीं है. इसके चलते औसत संकाय आयु 58 साल है, जो कि चिंता का विषय है.