लखनऊ. पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली शिकस्त से एनडीए के सहयोगी दल दूरी बनाने लगे हैं. केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल (सोनेलाल) भी भाजपा पर दवाब बनाती दिख रही है. अनुप्रिया ने अपने पति और अपना दल (एस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल के बयान का समर्थन करते हुए साफ कहा कि अब वह भाजपा के किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी. आशीष पटेल ने भाजपा के प्रदेश नेतृत्व पर अपने पार्टी नेताओं को लगातार अपमानित करने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि बीते छह महीने से अनुप्रिया पटेल के संसदीय क्षेत्र मिर्जापुर में होने वाले किसी भी कार्यक्रम में भाजपा के विधायक या जिलाध्यक्ष शामिल नहीं हुए. प्रदेश भाजपा नेतृत्व को बताने के बाद भी इस मुद्दे पर अभी तक अपना दल (एस) से कोई बात नहीं की गई. इसके बाद पार्टी प्रमुख आशीष पटेल ने निर्णय सुनाते हुए कहा था कि अब अनुप्रिया पटेल भी यूपी सरकार के किसी भी कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगी.

उन्होंने कहा था, “जब तक केंद्रीय नेतृत्व इस मसले का समाधान नहीं करता है, तब तक हम किसी भी तरह से भाजपा का सहयोग नहीं करेंगे.” अनुप्रिया पटेल ने गुरुवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस बयान का समर्थन किया और कहा कि अब वह भाजपा के किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी. अनुप्रिया ने पति के बयान का समर्थन करते हुए कहा, “भाजपा को हालिया पराजयों से सबक सीखना चाहिए. सपा-बसपा गठबंधन हमारे लिए चुनौती है, मेरी पार्टी के अध्यक्ष पार्टी का विचार व्यक्त कर चुके हैं, और मैं उससे सहमत हूं.” गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अभी तक प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर के बागी-रुख से आजिज भाजपा के लिए राजग के एक और सहयोगी अपना दल के बगावती तेवर से परेशानी हो सकती है. ओपी राजभर जहां आए दिन प्रदेश भाजपा नेतृत्व या पार्टी की नीतियों की सरेआम आलोचना करते हैं, वहीं अब अपना दल ने लोकसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारे के मसले पर भाजपा के रुख पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है.

बिहार में लोजपा के नक्शे-कदम पर अनुप्रिया
राजग में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा के सहयोगी दलों के बगावती तेवर की जो झलक उत्तर प्रदेश में अभी देखने को मिल रही है, बिहार में इसकी झांकी पिछले कुछ महीनों के दौरान दिख चुकी है. बिहार राजग में पहले केंद्रीय मंत्री और रालोसपा नेता उपेंद्र कुशवाहा ने राजग में अपनी ‘उपेक्षा’ का मसला उठाते हुए गठबंधन से अलग राहें पकड़ी थीं. वहीं उसके बाद एक अन्य सहयोगी लोजपा ने भी चुनाव से काफी पहले ही भाजपा पर दबाव बनाना शुरू कर दिया. रालोसपा और लोजपा के अलावा बिहार में सत्तारूढ़ जदयू के रुख भी ‘तीखे’ ही थे, जिसकी वजह से भाजपा को आखिरकार जदयू के साथ बराबर की सीटों से संतोष करना पड़ा, वहीं लोजपा को मनमाफिक सीटें देनी पड़ी. सियासी जानकारों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल का रुख बहुत कुछ लोजपा की तरह ही हैं. पटेल भी ‘मौसम का रुख’ भांपकर पहले से ही भाजपा के ऊपर दबाव बनाना चाहती हैं.

(इनपुट – एजेंसी)