नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को कहा कि एक विधायक होने के मद्देनजर कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ एक लोकसेवक के तौर पर मुकदमा चलाया जाएगा . अदालत ने उन्नाव कांड के मामले में विधायक के खिलाफ नए आरोप भी तय किए. सेंगर के खिलाफ नौ अगस्त को पॉक्सो कानून की धारा तीन और चार (एक बच्चे के खिलाफ यौन उत्पीड़न और इसकी सजा) के तहत तय आरोपों को कानून की धारा पांच (सी) और 6 (लोक सेवक द्वारा एक बच्चे का बलात्कार और उसकी सजा) में बदला गया.

आरोपों में बदलाव किए जाने के बाद इनके तहत दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 10 साल कारावास की सजा होगी जबकि कानून की धारा तीन के तहत न्यूनतम सजा सात साल थी. दोनों आरोपों के तहत अधिकतम सजा आजीवन कारावास हो सकती है. जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने कहा कि मैंने पाया कि यह सेंगर के खिलाफ पॉक्सो कानून की धारा तीन और चार के तहत तय आरोपों को पॉक्सो कानून की धारा छह के साथ पठित धारा पांच (सी) में बदलने का प्रथमदृष्ट्या मामला है. अदालत ने सेंगर के साथी शशि सिंह के खिलाफ भी आरोपों में बदलाव किया.

अदालत ने पीड़िता की मां की ओर से पेश वकील धर्मेंद्र मिश्रा और पूनम कौशिक के अनुरोध पर विचार करने के बाद आरोपों में बदलाव किया. सीबीआई की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक अशोक भारतेंदु ने इसका समर्थन किया. अदालत ने सेंगर के खिलाफ नौ अगस्त को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र), 363 (अपहरण), 366 (अपहरण एवं महिला पर विवाह के लिए दबाव डालना), 376 (1)(बलात्कार) और बाल यौन अपराध संरक्षण कानून (पॉक्सो) की धाराओं तीन और चार के तहत आरोप तय किए थे. हालांकि सेंगर और सिंह ने उन पर लगाए गए आरोपों से इनकार किया और कहा कि उन्हें मामले में गलत तरीके से फंसाया जा रहा है. सेंगर बलात्कार मामले में मुख्य आरोपी है और अप्रैल, 2018 से जेल में बंद हैं.